चित्रकूट जिले के कोषागार में सामने आए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच साल के अंतिम दिन भी जारी रही। बुधवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लखनऊ के सेंट्रल सर्वर से प्राप्त पेंशनरों के खातों का मिलान किया, जिसमें गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। सेंट्रल सर्वर से मिले पांच पेंशनरों के खातों में भेजी गई धनराशि का मिलान न तो संबंधित बैंकों से हो सका और न ही कोषागार विभाग के रजिस्टर से। इस गड़बड़ी के कारण जांच का दायरा अब वर्ष 2014 तक पहुंच गया है। जांच में यह भी सामने आया कि बुधवार को चिह्नित किए गए पांच खातों में चार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दर्ज है, जबकि कोषागार विभाग के ऑनलाइन विवरण में यही राशि मात्र दो करोड़ रुपये दर्शाई जा रही है। इस बड़े अंतर ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एसआईटी ने अब सभी 50 संदिग्ध खातों के लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा जुटाने के लिए संबंधित बैंकों के अधिकारियों की मदद लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, बुधवार को जिले में साल का अंतिम कार्यदिवस होने के कारण प्रशासनिक गतिविधियां अधिक रहीं। एडीएम की विदाई, लखनऊ से अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक और पुलिस विभाग में कई अधिकारियों के विदाई कार्यक्रमों के चलते कोषागार की जांच की गति कुछ धीमी रही। दिन के पहले पहर एसआईटी ने वर्ष 2014 से 2018 के बीच के 50 संदिग्ध खातों से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा गहन जांच की। इनमें से 10 खातों में धनराशि के अंतर पाए जाने पर वरिष्ठ कोषाधिकारी और दो एकाउंटेंट की मौजूदगी में मिलान कराया गया, लेकिन जांच टीम अभी भी इन खातों के रिकॉर्ड से संतुष्ट नहीं है। कागजी रिकॉर्ड और बैंक खातों में जहां लगभग चार करोड़ रुपये दर्शाए गए हैं, वहीं कोषागार के पटल पर यह राशि केवल दो करोड़ रुपये ही दिख रही है। करीब दो घंटे तक विभागीय अधिकारियों से इस अंतर को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। सूत्रों के अनुसार, इन 10 खातों से जुड़े लेन-देन तीन अलग-अलग बैंकों के माध्यम से हुए हैं। अब जांच टीम संबंधित बैंकों के कैशियर और अन्य अधिकारियों से पूछताछ करेगी। भुगतान के समय मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 93 पेंशनरों से जुड़े 15 खातों की जानकारी पहले ही लखनऊ के सेंट्रल सर्वर से प्राप्त की जा चुकी है। इनमें भी पांच खाते ऐसे मिले हैं, जिनमें भेजी गई लगभग चार करोड़ रुपये की राशि का विवरण विभागीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह सहित एकाउंटेंट राजबहादुर, योगेंद्र, राजेश और अशोक से लगातार डाटा मिलान कराया जा रहा है। एरियर, पेंशन रजिस्टर, पटल और डिजिटल हस्ताक्षरों की जांच के बावजूद अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। जांच जारी है।
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