उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले चारबाग रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की परियोजना धीमी रफ्तार से चल रही है। बजट की कमी और विभागीय स्तर पर सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट तय समय से काफी पीछे चल रहा है। हालात ऐसे हैं कि बाद में शुरू हुआ गोमतीनगर रेलवे स्टेशन चारबाग से आगे निकल चुका है। सेकंड एंट्री का भवन तैयार, मुख्य स्टेशन पर काम अधूरा पुनर्विकास योजना के तहत सेकंड एंट्री पर बहुमंजिला भवन बनकर तैयार हो गया है, लेकिन मुख्य स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई अहम कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं। कॉन्कोर्स निर्माण बीच में अटका प्लेटफॉर्मों पर बनने वाले कॉन्कोर्स के लिए नींव की खुदाई तो पूरी हो चुकी है, लेकिन छत डालने का काम फिलहाल रुका हुआ है। यह कॉन्कोर्स चारबाग और लखनऊ जंक्शन को आपस में जोड़ेगा, जहां टिकटिंग, एसी लाउंज और वेटिंग रूम जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। लिफ्ट और एस्केलेटर का इंतजार कॉन्कोर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जाने थे, लेकिन इनका काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे भविष्य की यात्री सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। फंडिंग बनी सबसे बड़ी बाधा सूत्रों के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में जारी 500 करोड़ रुपये की राशि अब कम पड़ रही है। दूसरी किस्त का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारी भले ही खुलकर कुछ न कहें, लेकिन फंड की कमी के चलते काम की रफ्तार धीमी होना साफ दिख रहा है। दूसरी रेलवे परियोजनाएं भी अधूरी…. गंगा पुल की मरम्मत पर ब्रेक कानपुर रूट पर स्थित गंगा पुल की एक लाइन की मरम्मत पूरी हो चुकी है। दूसरी लाइन की मरम्मत माघ मेला समाप्त होने के बाद की जाएगी, क्योंकि इस दौरान 50 से अधिक ट्रेनें प्रभावित होंगी। चारबाग–दिलकुशा आउटर फोरलेन अभी अधूरा चारबाग से दिलकुशा आउटर के बीच फोरलेन ट्रैक का काम भी पूरा नहीं हो सका है। कटाई वाले पुल पर नया ब्रिज बन चुका है, लेकिन उद्घाटन बाकी है। ट्रैक किनारे बैरिकेडिंग और नई लाइनें बिछाने का काम पूरा होने के बाद ट्रेनों को आउटर पर खड़ा करने की समस्या खत्म होने की उम्मीद है।
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