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गोल्डन बाबा बोले-मोदी के बाद योगी देश का नेतृत्व करें:कानपुर में कहा-अविमुक्तेश्वरानंद की बातें मेरी अंतरात्मा को चुभीं, संत समाज को जोड़े

प्रयागराज माघ मेले में इस बार आस्था के साथ सियासत की गूंज भी सुनाई दी। एक ओर अपने स्वर्ण आभूषणों और अनोखी पहचान के लिए मशहूर कानपुर के ‘गूगल गोल्डन बाबा’, तो दूसरी ओर अपने तीखे बयानों को लेकर चर्चा में रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद। माहौल तब और गरमा गया जब शंकराचार्य ने सीएम को लेकर विवादित बयान दिए और उस पर गोल्डन बाबा खुलकर सामने आ गए। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गोल्डन बाबा ने न सिर्फ बयान की आलोचना की, बल्कि इसके पीछे विपक्ष की साजिश तक का आरोप लगाया। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश— सवाल: प्रयागराज में आप सोने की वजह से चर्चा में रहे, लेकिन शंकराचार्य के बयान पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?
गोल्डन बाबा: उनका बयान मेरी अंतरात्मा को चुभ गया। सीएम की तुलना औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से करना एक संत की भाषा नहीं हो सकती। शास्त्र कहते हैं संत का हृदय कोमल होता है। संत का काम क्रोध करना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना होता है। यह तुलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सवाल: क्या आपको लगता है कि यह बयान किसी रणनीति का हिस्सा है?
गोल्डन बाबा: बिल्कुल। मुझे इसमें विपक्ष की सोची-समझी साजिश दिखती है। जो लोग पहले संतों पर लाठियां चलाते थे, वे आज अचानक उनके हितैषी कैसे हो गए? असल मकसद योगी जी को बदनाम करना और सनातन समाज में दरार डालना है। सवाल: आपने योगी जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए ‘योगी रथ’ निकालने की घोषणा की है, इसका उद्देश्य क्या है?
गोल्डन बाबा: मेरा संकल्प है कि मोदी जी के बाद योगी जी देश का नेतृत्व करें। इसके लिए मैं 2025 तक ‘योगी रथ’ के साथ उत्तर प्रदेश के पवित्र जिलों और तीर्थों की नंगे पैर यात्रा करूंगा। सनातन जब संगठित होगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा। यह मेरा दो साल का विशेष मिशन है। गोल्डन बाबा ने साफ कर दिया कि उनकी पहचान भले ही स्वर्ण आभूषणों से जुड़ी हो, लेकिन धर्म और राजनीति के सवालों पर उनकी सोच मुखर है। शंकराचार्य के बयान को संतों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए उन्होंने माघ मेले से एक नई बहस को हवा दे दी है। सवाल: हाल ही में आपको महामंडलेश्वर की उपाधि और जूना अखाड़े में राष्ट्रीय उप-संयोजक का पद मिला है। इस नई जिम्मेदारी को कैसे देखते हैं?
गोल्डन बाबा: यह सब प्रभु की कृपा है। जो भी मुझे मिला है, वह सेवा का माध्यम है। अब मुझे श्री श्री 1008 गोल्डन गिरी जी महाराज के नाम से जाना जाएगा। जूना अखाड़े ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे मैं पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। पहचान वही मायने रखती है, जो ईश्वर ने तय की हो।


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