गोरखपुर में शिक्षक और मध्यम वर्ग के लोगों में पेश किए गए नए बजट 2026-27 को लेकर निराशा देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि बजट में उनकी रोजमर्रा की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। आयकर और महंगाई जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस राहत नहीं मिलने से असंतोष बढ़ा है। मध्यम वर्ग के लिए बजट निराशाजनक उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा कि यह बजट मध्यम वर्ग के लिए पूरी तरह निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि आयकर की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है और स्थिति पिछले साल जैसी ही बनी हुई है। राजेश धर दुबे ने कहा कि सरकार भले ही 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त बता रही हो, लेकिन जैसे ही आय थोड़ी भी आगे बढ़ती है, उस पर ज्यादा टैक्स लग जाता है। इससे मध्यम वर्ग को कोई असली फायदा नहीं मिल पा रहा है। सस्ती बताई गई चीजें आम आदमी के काम की नहीं उन्होंने कहा कि बजट में कुछ चीजों के सस्ता होने की बात कही गई है, लेकिन उनका आम लोगों के जीवन में खास महत्व नहीं है। रसोई का सामान, पढ़ाई, इलाज और घर के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि इन पर कोई राहत नहीं दी गई। शिक्षक और कर्मचारियों के लिए बजट बेअसर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि यह बजट शिक्षक और कर्मचारियों के लिए पूरी तरह निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि हर साल महंगाई बढ़ रही है, लेकिन आयकर की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि महंगाई को देखते हुए जो वेतन बढ़ता है, उसका बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में चला जाता है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों को हाथ में कुछ खास नहीं बचता। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे हैं जैसे शिक्षक और कर्मचारी आज भी कई साल पुराने वेतन पर काम कर रहे हों। महंगाई और टैक्स की वजह से परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। बचत घट रही, आर्थिक दबाव बढ़ा
शिक्षकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण उनकी बचत लगातार कम हो रही है। पहले जो पैसा भविष्य के लिए बच जाता था, अब वही रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो रहा है। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि आने वाले बजट में आयकर सीमा बढ़ाई जाए, महंगाई के हिसाब से राहत दी जाए और मध्यम वर्ग व कर्मचारियों को सीधा लाभ देने वाले फैसले किए जाएं।
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