गोरखपुर के मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में दरूद बॉक्स बनाने वाली इस्लामी बहनों को सम्मानित किया गया। रूमी, शिरीन बानो, इरम परवीन, असगरी खातून, साइमीन, नौशीन, अख्तरुन्निसा, अलीशा, तैयबा, खुशी और कौसर फातिमा को शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी की वालिदा आस्मां खातून और वरिष्ठ शिक्षक मुजफ्फर हसनैन रूमी ने पुरस्कार प्रदान किया। जामिया अल इस्लाह एकेडमी गोरखनाथ और सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में चालीस हदीसों पर आधारित विशेष कार्यशाला के सातवें सप्ताह की कक्षाएं संपन्न हुईं। इसमें रिश्तेदारों के हुकूक, बड़ों और छोटों की जिम्मेदारियां तथा नेक बंदों की खूबियों पर विस्तृत चर्चा हुई। रिश्तेदारी के अधिकारों पर विस्तार से समझाया गया विशिष्ट वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि कुरआन और हदीस रिश्तेदारों के साथ दया, सम्मान और विनम्रता से पेश आने का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर रिश्तेदारों की सहायता, बीमारों से मुलाकात, जकात-सदका में उन्हें प्राथमिकता देना और उनके साथ रिश्ता बनाए रखना मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सच्ची रिश्तेदारी वही है जब एक व्यक्ति उनसे भी संबंध बनाए रखे जो उससे संबंध तोड़ते हैं। परिवार- समाज को मजबूत करने वाली सीख दी गई कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि बड़ों का कर्तव्य है कि वे छोटों को प्यार, मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान करें, जबकि छोटों की जिम्मेदारी है कि वे बड़ों का सम्मान करें और उनकी सलाह मानें। उन्होंने कहा कि परस्पर सम्मान ही परिवार और समाज की मजबूती का आधार है। नेक बंदों की पहचान- जीवनशैली बताई गई शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने अल्लाह के नेक बंदों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे ईमानदारी, सच्चाई, विनम्रता और नमाज के पाबंद होते हैं। वे सब्र करते हैं, अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते हैं और अपनी संपत्ति में से जरूरतमंदों का हक अदा करते हैं। गलती होने पर वे तुरंत तौबा करते हैं।
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