हापुड़ में गैंगस्टर एक्ट के एक मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) ने गैंगचार्ट में गलत जानकारी दिए जाने पर एसपी, डीएम और कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक को तलब कर लिया है। कोर्ट ने तीनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। क्या है पूरा मामला यह मामला अरोपी रजनी की ओर से गैंगस्टर एक्ट में नियमित जमानत के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान रजनी के वकील ने कोर्ट को बताया कि गैंगचार्ट में उनके खिलाफ अपराध संख्या 155/2025 और 156/2025 दर्शाए गए हैं और यह लिखा गया है कि इन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। वकील का कहना था कि हकीकत यह है कि दोनों मामलों में अभी जांच चल रही है, न तो चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही कोर्ट ने संज्ञान लिया है। इतना ही नहीं, अपराधी इन मामलों में पहले से ही थाने से जमानत पर हैं। रिकॉर्ड देखने पर खुली पोल कोर्ट ने जब सरकारी रिकॉर्ड और प्रमाणित कागजात देखे, तो सामने आया कि 9 दिसंबर 2025 को डीएम और एसपी ने गैंगचार्ट को मंजूरी दी थी, लेकिन उसमें गलत तथ्य दर्ज कर दिए गए। रिकॉर्ड से साफ हो गया कि चार्जशीट दाखिल होने की बात सच नहीं है। कोर्ट ने क्यों माना गंभीर कोर्ट का मानना है कि गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर कानून में गलत जानकारी देना न केवल अभियुक्त के अधिकारों का हनन है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। इसी को देखते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। 5 फरवरी को कोर्ट में पेशी विशेष न्यायाधीश वीरेश चंद्रा ने आदेश दिया है कि कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक, एसपी और डीएम
5 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे
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