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गाजियाबाद-गोंडा तक स्केटिंग, भाई-बहन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड:8 दिन में 500 KM चले, गोंडा में सद्गुरु रितेश्वर महाराज को समर्पित किया मेडल

गाजियाबाद से अयोध्या और अयोध्या से गोंडा तक स्केटिंग कर 11 वर्षीय युग नागर और 9 वर्षीय नंदिनी नागर ने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। दोनों सगे भाई-बहनों ने अपनी यह उपलब्धि श्री आनंद धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज के 53वें जन्मोत्सव पर उन्हें समर्पित की है। सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का 53वां जन्मोत्सव आज गोंडा जिले के नंदिनी निकेतन में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर 50,000 से अधिक लोग उपस्थित रहे। मंच पर पहुंचकर महाराज को फूल भेंट कर बधाई दी। महाराज ने किसी भी प्रकार का कोई उपहार स्वीकार नहीं किया। युग और नंदिनी ने 29 दिसंबर को गाजियाबाद से अपनी स्केटिंग यात्रा शुरू की थी और 5 जनवरी को अयोध्या पहुंचकर इसे पूरा किया। उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि वे सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज के जन्मदिन पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर उन्हें समर्पित करेंगे। उपलब्धि हासिल करने के बाद, दोनों भाई-बहनों ने महाराज के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह उनका दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड है। हरिद्वार से गाजियाबाद तक कांवड़ लाने का भी है रिकॉर्ड इससे पहले शिवरात्रि पर दोनों भाई-बहनों ने हरिद्वार से गाजियाबाद तक कांवड़ में जल लेकर इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। 11 वर्षीय युग नागर, जो कक्षा 6 में पढ़ते हैं, ने बताया कि वे और उनकी बहन नंदिनी (कक्षा 5) पिछले एक वर्ष से नियमित रूप से इनलाइन स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। इसी अभ्यास के बल पर उन्होंने गाजियाबाद से अयोध्या धाम तक की चुनौतीपूर्ण स्केटिंग यात्रा पूरी की। सद्गुरु बोले- ये उपहार अनमोल है सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने मंच से बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह स्केटिंग यात्रा आने वाले समय में केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि संस्कार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सनातन चेतना का जीवन उदाहरण बनेगी। जो समाज की हर वर्ग को प्रेरित करेगी यह बच्चे दोनों हमारे आश्रम पर नियमित रूप से आते रहते हैं और इन्होंने जो आज जन्मदिन के अवसर पर मुझे उपहार दिया है वह अनमोल उपहार है और मैं उसका जीवन आभारी रहूंगा। सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने मंच से बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह स्केटिंग यात्रा आने वाले समय में केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि संस्कार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सनातन चेतना का जीवन उदाहरण बनेगी। जो समाज की हर वर्ग को प्रेरित करेगी यह बच्चे दोनों हमारे आश्रम पर नियमित रूप से आते रहते हैं और इन्होंने जो आज जन्मदिन के अवसर पर मुझे उपहार दिया है वह अनमोल उपहार है और मैं उसका जीवन आभारी रहूंगा।


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