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गाजियाबाद की बच्चियां हारी नहीं, अकेली पड़ गईं थीं:सोनू सूद बोले- बच्चों को स्क्रीन नहीं, हमारा साथ चाहिए; ऑनलाइन गेम पर बैन लगाओ

बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद जिन्होंने कोविड में अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना लोगों की मदद की। उन्होंने इस बार गाजियाबाद तीन बहनों के सुसाइड मामले में मुहिम छेड़ी है। उन्होंने कहा- गाजियाबाद में तीन बच्चियां हारी नहीं थी। अकेली पड़ गई थी। ऑनलाइन और सोशल मीडिया की दुनिया में हम अपने बच्चों को इतना आगे छोड़ आए हैं कि हमें उनकी चुप्पी सुनाई नहीं देती। उन्होंने कहा- गाजियाबाद में जिन तीन बच्चियों ने अपनी जान दे दी, वह हारी नहीं थी। अकेली पड़ गई थी। ऑनलाइन और सोशल मीडिया की दुनिया में हम अपने बच्चों को इतना आगे छोड़ आए हैं कि हमें उनकी चुप्पी सुनाई नहीं देती। बच्चों को ऑनलाइन और सोशल मीडिया से दूर रखें कुछ समय पहले ही मैंने गुहार लगाई थी कि 16 साल से कम उम्र के बाद जो बच्चे हैं उन्हें हमें ऑनलाइन और सोशल मीडिया की जो गेमिंग है और वो दुनिया है उससे बहुत दूर रखना है। लेकिन हम अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे परिवार के अंदर एक और ऐसा सदस्य है जो हमारा मोबाइल फोन जो हमारे सोशल मीडिया है। जिनके साथ बच्चे हमसे ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। बच्चों के लिए समय निकालिए अगर हम चाहते हैं कि उनकी जिंदगी, हमारी जिंदगी, उनका भविष्य, हमारे देश का भविष्य बेहतर हो, तो सबसे पहले इस पर बैन लगाना जरूरी है। आप सोचिए कि उन्हें स्क्रीन नहीं, हमारा साथ चाहिए। बच्चों को मोबाइल नहीं, हमारी मौजूदगी चाहिए, डांट नहीं, हमारी बातचीत चाहिए। लेकिन हमारे पास भी कहां समय है उनके लिए? क्योंकि हमने उनके हाथ में एक सोशल मीडिया से लेस मोबाइल फोन थमा दिया है। ताकि वह पढ़ते रह, देखते रहें। पढ़ाई के लिए टेक्नोलॉजी जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उस टेक्नोलॉजी के लिए अपने बच्चों की जो जान है वो खतरे में डाल दें। पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन होने चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया के लिए नहीं। खासकर कम उम्र के बच्चों के लिए। चलिए आज मिलकर एक कोशिश करें कि हम उस सदस्य को जो हमारे परिवार को बांट रहा है उसे थोड़ा सा दूर करें। इससे पहले देर हो जाए मिलकर वो कानून बनाएं ताकि हमारे बच्चे हमारे साथ रह सके। सोशल मीडिया के साथ में ऑनलाइन गेमिंग के साथ में। धन्यवाद। अब पूरा मामला जान लीजिए बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से कूद गईं 3 बहनें
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात 2 बजे तीनों ने कमरे को अंदर से बंद किया, फिर स्टूल रखकर एक-एक करके बालकनी से छलांग लगा दी। उनकी उम्र करीब 12, 14 और 16 साल है। पिता के मुताबिक, तीनों बेटियों को टास्क-बेस्ड कोरियन लव गेम की लत थी। वे हर वक्त एकसाथ रहती थीं। एक साथ नहाती थीं और टॉयलेट जाती थीं। इस कदर गेम की लत थी कि स्कूल भी छोड़ दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि पिता ने उन्हें गेम खेलने से मना किया और फटकार लगाई। इसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। तीनों बहनें जिस कमरे में सोती थीं, वहां पुलिस को एक डायरी मिली है। इसके 18 पन्नों में सुसाइड नोट लिखा मिला। पुलिस का दावा है कि नोट में लिखा है- “मम्मी-पापा सॉरी… गेम नहीं छोड़ पा रही हूं। अब आपको एहसास होगा कि हम गेम से कितना प्यार करते थे, जिसको आप छुड़वाना चाहते थे।” घटना भारत सिटी बी-1 टॉवर के फ्लैट नंबर 907 की है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर आलोक प्रियदर्शी ने बताया- अभी तक की जांच में सामने आया है कि तीनों ने आत्महत्या की है। तीनों मोबाइल से गेम खेलती थीं। किन परिस्थितियों में आत्महत्या की गई, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस बोली- मोबाइल फोन में कोरियन कल्चर में ढलने के सबूत मिले
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि तीनों बहनों ने कथित रूप से सुसाइड किया है। जिसमें उनके पिता से पुलिस ने बयान दर्ज किए हैं। पता चला कि पिता कारोबार में घाटा भी आ चुका हैं, जिसमें मोबाइल फोन में कोरियन के साक्ष्य मिले हैं, जहां तीनों ने अपने अलग नाम रख रहे थें। इसमें पुलिस पूरे साक्ष्य के आधार पर आगे की जांच कर रही है।


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