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गलत इतिहास पढ़ाकर भारत की संस्कृति कमजोर की:केंद्रीय हिंदी संस्थान में बोले राजस्थान के राज्यपाल, पुस्तकालय संगोष्ठी किया उद्घाटन

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े आज केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा पहुंचे, जहां उन्होंने 71वीं अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय इतिहास, शिक्षा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर पश्चिमी दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल उठाए। इस दौरान कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। गलत इतिहास पढ़ाकर भारत की संस्कृति को कमजोर किया गया: राज्यपाल
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने कहा कि भारत को वर्षों तक गलत इतिहास पढ़ाया गया, जिससे देश की मूल संस्कृति और ज्ञान परंपरा कमजोर हुई। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके कारण लाखों गुरुकुल बंद हो गए और समाज अपनी जड़ों से दूर होता चला गया। राज्यपाल ने कहा कि हमें बताया गया कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की, जबकि हमारे देश के ऋषि भारद्वाज ने सदियों पहले इसके महत्व को समझाया था। इसी तरह राइट बंधुओं को विमान का जनक बताया गया, जबकि ऋषि भारद्वाज के ग्रंथों में विमान विज्ञान का विस्तृत उल्लेख मिलता है। 1500 फीट तक भारतीय द्वारा उड़ाया गया विमान, तकनीक ले गए अंग्रेज
उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक भारतीय द्वारा 1500 फीट की ऊंचाई तक विमान उड़ाया गया था, लेकिन अंग्रेज इस तकनीक को अपने साथ ले गए। जब वे इसे समझ नहीं पाए तो इसे अमेरिका के साथ साझा कर दिया गया। अकबर-जोधा की कहानी का कोई ऐतिहासिक आधार नहीं
राज्यपाल ने कहा कि अकबर-जोधा की कहानी को फिल्मों और इतिहास में बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, जबकि इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों को जलाकर करीब नौ लाख पुस्तकों को नष्ट कर दिया गया। प्राचीन भारत में सभी विषयों का होता था अध्ययन
राज्यपाल बागड़े ने कहा कि प्राचीन काल में भारत में विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, भूगोल, आयुर्वेद, अंतरिक्ष विज्ञान सहित सभी विषयों का उच्च स्तर पर अध्ययन कराया जाता था, लेकिन इस गौरवशाली विरासत को योजनाबद्ध तरीके से भुला दिया गया। डिजिटल पुस्तकों की खपत तेजी से बढ़ी
डिजिटल युग पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि पारंपरिक पुस्तकों की खरीद की तुलना में डिजिटल पुस्तकों की खपत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों को इस बदलाव के अनुरूप खुद को आधुनिक बनाना होगा, ताकि ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
कई पुस्तकों का किया विमोचन
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने विभिन्न विषयों पर प्रकाशित कई पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुलकर्णी ने राज्यपाल को ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में राधा-कृष्ण की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया। पूरे सम्मान के साथ हुआ स्वागत
राज्यपाल के केंद्रीय हिंदी संस्थान पहुंचने पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। उन्होंने सबसे पहले सत्यनारायण गॉड के जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद राष्ट्रगान और संस्थान गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद विभिन्न प्रांतों के बच्चों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। 5 से 7 फरवरी तक चलेगी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय और भारतीय पुस्तकालय संघ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह तीन दिवसीय 71वीं अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय संगोष्ठी 5 से 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। संगोष्ठी का मुख्य विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में पुस्तकालय सेवाओं का रूपांतरण: पुस्तकालय सेवाएँ, उपयोगकर्ता सहभागिता और सामुदायिक प्रभाव” है। इसमें देशभर से सैकड़ों शिक्षाविद, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।


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