भदोही पुलिस ने कोडीन युक्त सिरप के अवैध कारोबार में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी शैलेन्द्र तिवारी (44) को माधोसिंह रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ा गया। वह वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र का निवासी है। एसपी अभिमन्यु मांगलिक के निर्देश पर अपराध नियंत्रण अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के कुशल पर्यवेक्षण और उपनिरीक्षक दिनेश कुमार, थाना ज्ञानपुर की विवेचनात्मक कार्यवाही के बाद औराई पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर यह गिरफ्तारी की। आरोपी पर औषधि विक्रय अनुज्ञप्ति का दुरुपयोग करने का आरोप है। वह अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के औषधियों को खुले बाजार में नशे के रूप में बेचता था। इसके लिए आपराधिक षडयन्त्र के तहत कूटरचित एवं फर्जी विक्रय बीजकों का भी इस्तेमाल किया जाता था। यह गिरफ्तारी थाना औराई/चौरी में पंजीकृत अभियोगों के संबंध में की गई है। मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21सी/27क/29(1) को बढ़ाया गया है और आगे की आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है। आरोपी ने बताया- साल 2024 में एक व्यक्ति द्वारा उसकी मुलाकात दवा मंडी, वाराणसी के एक दवा व्यापारी से कराई गई। उक्त दवा व्यापारी ने उसे दिल्ली की एक फर्म से मिलवाया। दवा व्यापारी द्वारा बताया गया कि कोडीन कफ सिरप की वास्तविक सप्लाई किए बिना केवल कागजों में सप्लाई दिखानी है, जिसके लिए इनवार्ड-आउटवार्ड एंट्री दिखाई जाएगी तथा फर्जी ई-वे बिल तैयार कर जीएसटी फाइल की जाएगी। अभियुक्त ने बताया कि एक कोडीन कफ सिरप का बिल बनाने के एवज में उसे एक रुपये प्रति बोतल की दर से भुगतान किया जाता था। उसके द्वारा कई फर्मों से कोडीन सिरप प्राप्त करना केवल कागजों में दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य फर्में भी हैं, जिनसे कोडीन सिरप की सप्लाई दिखायी गई। अभियुक्त द्वारा उक्त फर्मों को लगभग 10 लाख बोतल कोडीन कफ सिरप की सप्लाई कागजों में दर्शाई गई है। सभी प्रपत्र फर्जी व कूटरचित तरीके से उसके कहने पर तैयार कराए जाते थे। ई-वे बिल बनाते समय फर्जी तरीके से किसी भी वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित कर दिया जाता था। जैसे ही कैश डिपॉजिट या अन्य माध्यम से खातों में धनराशि जमा होती थी, उसे कुछ ही घंटों के भीतर आरटीजीएस अथवा एनईएफटी के माध्यम से उसकी फर्म के एचडीएफसी बैंक स्थित खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस प्रकार कुल लगभग 3 करोड़ रुपये उसके खाते में आए थे। इसके अतिरिक्त कई अन्य फर्मों से भी भारी मात्रा में धनराशि उसके खाते में प्राप्त हुई। उक्त धनराशि उसके द्वारा एक मेडिकल एजेंसी को ट्रांसफर की जाती थी। अभियुक्त ने बताया कि वर्ष 2025 में उसके खाते में कुल ₹12,13,38,102 रुपये की जमा एवं निकासी हुई है। आरोपी ने स्वीकार किया कि वास्तविक रूप से उसे इस पूरे कार्य के बदले लगभग 12 से 15 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। उसे यह लालच दिया गया था कि उसे कोई कार्य नहीं करना है, केवल अपने बैंक खाते का प्रयोग होने देना है तथा इनवॉइस बिल और ई-वे बिल तैयार करने हैं, जिसके एवज में उसे मोटी रकम दी जाएगी। लालच में आकर उसने यह कार्य किया। अभियुक्त ने यह भी बताया कि उक्त फर्म उसकी पत्नी के नाम पर ली गई थी, लेकिन इस पूरे अवैध कार्य का संचालन पूरी तरह से उसके द्वारा ही किया जा रहा था।
https://ift.tt/Rd1siDw
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply