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कोडीन कफ सिरप केस, अंकुल मौर्या का रिमांड बना:एनडीपीएस एक्ट की धारा बढ़ी, 18 फरवरी को अगली सुनवाई

जौनपुर में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में आरोपी अंकुल कुमार मौर्या को अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में पेश किया गया। अंकुल मुरादगंज लाइन बाजार का निवासी है और पहले से ही मारपीट के एक अन्य मामले में जेल में बंद था। इस मामले की विवेचना के दौरान एनडीपीएस एक्ट की धाराएं बढ़ाई गई हैं। अंकुल के अधिवक्ता प्रवीण सोलंकी ने अदालत में तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पहले से ही जेल में है और कोडीन कफ सिरप मामले में भी वांछित है। इसलिए इस मामले में भी उसकी रिमांड स्वीकार कर न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाए। अदालत ने आरोपी पर धोखाधड़ी, जालसाजी के साथ-साथ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में भी रिमांड स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने अंकुल को जेल भेजते हुए अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की है। यह मामला कोतवाली थाने में औषधि निरीक्षक रजत कुमार द्वारा 21 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई रिपोर्ट से संबंधित है। एफआईआर में भोला प्रसाद, शुभम जायसवाल और अंकुल मौर्या सहित कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि जनपद की 12 फर्मों ने भोला जायसवाल की फर्म मेसर्स शैली ट्रेडर्स के माध्यम से लगभग 42 करोड़ रुपये के कोडीन युक्त कफ सिरप का अवैध कारोबार किया। जांच में सामने आया कि सिरप वास्तव में जिले में आई ही नहीं, लेकिन उसकी बिक्री कागजों पर दिखा दी गई। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप को गैर-चिकित्सीय नशे के रूप में उपयोग करने के उद्देश्य से बेचा गया, जिससे अवैध लाभ कमाया जा सके। हालांकि, आरोपी के अधिवक्ता प्रवीण सिंह सोलंकी ने बचाव पक्ष की दलील पेश करते हुए कहा कि आरोपियों के पास अपने मेडिकल स्टोर के वैध लाइसेंस हैं। उन्होंने 14 नवंबर 1985 के सरकारी नोटिफिकेशन के क्लॉज 35 का हवाला दिया, जिसके अनुसार ‘न्यू फैंसीडिल कफ सिरप’ नारकोटिक ड्रग के दायरे में नहीं आता। अधिवक्ता ने बताया कि इस सिरप को बनाने वाली एबॉट इंडिया लिमिटेड कंपनी भारत सरकार द्वारा अधिकृत है और ड्रग रूल्स 1945 के रूल 97 के तहत यह कफ सिरप ‘आरएक्स लेवल’ प्राप्त है, जो दर्शाता है कि यह नारकोटिक ड्रग नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिन प्रपत्रों को फर्जी बताया जा रहा है, उनके सापेक्ष जीएसटी विभाग में कर का भुगतान किया गया है और वे प्रपत्र जीएसटी विभाग में जमा हैं, इसलिए उन्हें कूट रचित नहीं कहा जा सकता।


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