फिल्म ‘कल्कि संभल’ की शूटिंग नहीं होने देने की धमकी के बाद फिल्म प्रोड्यूसर अमित जानी ने कहा- फिल्म की शूटिंग होगी या नहीं, यह फैसला योगी सरकार लेगी। कोई मुल्ला या मौलाना इस पर निर्णय नहीं देगा। दरअसल, यह फिल्म संभल के 1978 के दंगों और 24 नवंबर 2024 की हिंसा पर आधारित है। 2 फरवरी को फिल्म का पोस्टर रिलीज किया गया। दो प्रमुख किरदार ‘अब्बाजान’ और ‘भाईजान’ सामने आए। विजय राज और महेश मांजरेकर अभिनीत इस फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी हैं। लेकिन फिल्म का पोस्टर सामने आने के बाद बवाल भी शुरू हो गया। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने शूटिंग नहीं होने देने का ऐलान किया है। अब पढ़ें प्रोड्यूसर अमित जानी से बातचीत का प्रमुख अंश… 1. कल्कि संभल बनेगी और संभल में ही शूटिंग होगी भास्कर से बातचीत के फिल्म प्रोड्यूसर अमित जानी ने कहा- यूपी में योगी सरकार है। शूटिंग होगी या नहीं, इसका फैसला सरकार करेगी। क्या कानून से ऊपर कोई है। पहले भी फिल्मों का विरोध हुआ है, लेकिन फिल्में बनीं और रिलीज हुईं। कल्कि संभल भी बनेगी और संभल में ही शूट होगी। बर्क के कोर्ट जाने के बयान पर कहा- कोर्ट जाने से हमें कोई दिक्कत नहीं है। कोर्ट जाएं, शौक से जाएं। अरशद मदनी भी उदयपुर फाइल्स को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट गए थे, उससे भी हमें कोई दिक्कत नहीं है। 2. शूट नहीं होने की धमकी देना दंगाई भाषा है… प्रोड्यूसर अमित जानी ने कहा- शूट नहीं होने देंगे- यह बवाल की भाषा है। आपने पहले कहा था कि हरिहर मंदिर बनाम जामा मस्जिद के मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद सर्वे नहीं होने देंगे। तब क्या हुआ? दंगा फैलाया गया, डीएम‑एसएसपी पर हमला हुआ। अब आप कह रहे हैं कि शूट नहीं होने देंगे। यह दंगाई भाषा है। यह बवाल की भाषा है, जो ममलूकुर्रहमान बोल रहे हैं। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए हम उन्हें लीगल नोटिस थमा रहे हैं। 3. शूटिंग संभल में ही होगी उन्होंने कहा- अगर ये सोचते हैं कि इनके डराने से कोई डर जाएगा और संभल में शूट नहीं होगा, तो साफ कर दूं, शूट संभल में ही होगा। यहीं नारियल फूटेगा और इसे कोई नहीं रोक सकता। न जिया, न जिया के पिताजी, न उनके पिताजी। अभी तो केवल दो कैरेक्टर रिवील हुए हैं, फिर भी बवाल मच गया। बाकी कैरेक्टर भी धीरे-धीरे सामने आएंगे। अभी एसपी संभल, डीएम संभल, सीओ अनुज चौधरी और बाकी लोगों के कैरेक्टर रिवील होना बाकी हैं। संभव है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम, जिनके साथ ये 16 साल तक लड़े, उनका भी कोई कैरेक्टर हो। अभी तो कैरेक्टर रिवील होने शुरू ही हुए हैं।
4. ममलूकुर्रहमान को संभल के लोग पागल कहते… फिल्म को फिल्म के तरीके से देखिए। हम वही दिखाएंगे जो संभल में हुआ है। अगर आपके कर्म खराब हैं, तो वे दिखेंगे ही उसमें हमारी क्या गलती। अगर आपत्ति है तो कोर्ट जाएं, चौखट पर बैठकर धमकी मत दीजिए कि शूट रोक देंगे। आप नहीं रोक पाएंगे। शफीकुर्रहमान भी कब्र से निकलकर नहीं रोक पाएंगे। आपकी हैसियत क्या है। अमित जानी ने पूछा, “ममलूकुर्रहमान कौन है? संभल के लोग तो कहते हैं- पगला है कोई। मेरी फिल्म है, मैं बना रहा हूं, मेरे एक्टर को तकलीफ नहीं है, मेरे डायरेक्टर भारत श्रीनेत को तकलीफ नहीं है। जिस विषय पर बन रही है, जिन पीड़ितों पर बन रही है, उनके परिवार वालों को तकलीफ नहीं है। ममलूकुर्रहमान कौन है? हमारे यहां ऐसे लोगों को दीवाना कहते हैं। 5. सरकार से अनुमति और सुरक्षा जब यूपी में फिल्म की शूटिंग होती है तो उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति ली जाती है। सरकार अनुमति देती है और सुरक्षा की गारंटी भी देती है। यहां फिल्म सिटी बन रही है, ताकि देश‑भर के अभिनेता, निर्देशक और निर्माता यहां आकर स्टूडियो बना सकें और शूट कर सकें। यह इसलिए नहीं है कि कहीं संभल, कहीं देवबंद, कहीं अलीगढ़, कहीं गाजियाबाद या लखनऊ में गली‑मोहल्लों में बैठे लोग धमकियां दें। अगर हर जगह ऐसे लोग धमकी देंगे तो फिल्म सिटी का मतलब ही खत्म हो जाएगा। फिर विकास कैसे होगा? ऐसी धमकियों के खिलाफ हम पूरी तरह कानूनी कार्रवाई करेंगे। अब पढ़िए ममलूकुर्रहमान बर्क ने जो कहा… दरअसल, बीती 1 फरवरी को संभल पहुंचे अमित जाने ने अपनी फिल्म का नाम दैनिक भास्कर को “कल्कि संभल” बताया था। उन्होंने 02 फरवरी को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसी नाम के साथ फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया। अमित जानी ने “अब्बाजान और भाईजान” के नाम से फिल्म के दो किरदार भी सामने लाए। फिल्म का पोस्टर रिलीज होते ही सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने दीपा सराय स्थित अपने आवास बर्क मंजिल में कहा- ऐसी फिल्म बनाना सौहार्द और माहौल को खराब करने जैसा है। जब घटना हो चुकी है और मामला अदालत में है, तो फिल्म बनाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ही इस पर फैसला करेगी, न कि फिल्म बनाने से कोई निर्णय होगा। उन्होंने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि हम फिल्म निर्माताओं के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। क्योंकि उनका मानना है कि ये लोग हालात को खराब करना चाहते हैं। बोले – 1978 के दंगों की शुरुआत गैर मुस्लिम ने की ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा कि ये हालात बिगाड़ना और हिंदू-मुसलमानों को आपस में लड़ाना चाहते हैं। बर्क ने 1978 के दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि तब डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क संभल में मौजूद नहीं थे। 1978 के बलवे की शुरुआत मुसलमानों ने नहीं की थी, बल्कि एक गैर-मुस्लिम व्यक्ति जामा मस्जिद में जल चढ़ाने की नीयत से गया था। जब इमाम साहब ने उसे रोका, तो उसने धारदार चीज से हमला कर इमाम को शहीद कर दिया। इमाम की कब्र आज भी जामा मस्जिद में बनी हुई है। केरल की बैठक में शामिल होने गए थे संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर जियाउर्रहमान बर्क की मौजूदगी को लेकर ममलूकुर्रहमान ने स्पष्ट किया कि वह उस दिन संभल में नहीं थे, बल्कि केरल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में शामिल थे। अखिलेश यादव ने भी इस बात की पुष्टि की है। ममलूकुर्रहमान बर्क ने ऐसी फिल्में बनाने की अनुमति देने वालों पर भी सवाल उठाया। जो ऐसी इजाजत दे रहा है, वह शांति का दुश्मन है और अमन पसंद नहीं है। ———————————————— ये खबर भी पढ़ेंः- यूपी में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर FIR:योगी के आदेश पर इंस्पेक्टर ने कराई; मायावती बोलीं- यह ब्राह्मण समाज का अपमान यूपी में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर विरोध शुरू हो गया है। लखनऊ में फिल्म के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। शिकायत सीएम के निर्देश पर खुद हजरतगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने कराई है।
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