इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कायस्थ पाठशाला (केपी) ट्रस्ट के चुनाव में पुनर्गणना मामले में एकलपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली डा. सुशील सिन्हा की विशेष अपील खारिज कर दी है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। प्रयागराज स्थित कायस्थ पाठशाला सोसायटी एक पंजीकृत संस्था है। अपीलकर्ता डा.सुनील सिन्हा और प्रतिवादी राघवेंद्र नारायण सिंह ने संस्था अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा।
मतदान 25 दिसंबर 2023 को हुआ। अगले दिन हुई मतगणना में अपीलकर्ता को सबसे अधिक वोट प्राप्त होने के कारण अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। प्रतिवादी ने चुनाव को चुनौती दी और एसडीएम के 22 मार्च 2025 के आदेश पर पुनमर्तगणना कराई गई और राघवेंद्र को विजयी घोषित कर सहायक रजिस्ट्रार ने 28 मार्च 2025 को प्रमाण पत्र जारी किया।
इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन एकलपीठ ने 15 नवंबर 2025 को याचिका खारिज कर दी थी। डाक्टर सिन्हा ने विशेष अपील में यह मांग भी की थी कि प्रतिवादी को अध्यक्ष पद से हटाया जाए और जब तक फैसला नहीं हो जाता तब तक प्रतिवादी को अध्यक्ष पद पर कार्य करने से रोका जाए। अपीलार्थी के अधिवक्ताओं का कहना था कि सेक्शन 25(2) के प्रावधानों को अनदेखा किया है और गलत तरीके से माना है कि पुनर्गणना के बाद एक उम्मीदवार को दूसरे के स्थान पर घोषित किया जा सकता है वह भी बिना नए चुनाव के। सहायक रजिस्ट्रार के पास चुनाव रद करने या किसी को निर्वाचित घोषित करने की शक्ति नहीं है। यदि सक्षम प्राधिकारी ने चुनाव रद किया है तो सहायक रजिस्ट्रार को सेक्शन 25(2) के तहत नए चुनाव के लिए बैठक बुलानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, इसलिए उनका आदेश अवैध हो जाता है। सक्षम प्राधिकारी को सहायक रजिस्ट्रार को पुनर्गणना के लिए निर्देश देना चाहिए था और फिर रिकॉर्ड को अपने पास बुलाना चाहिए था।
ऐसा नहीं हुआ। दोनों ने चुनाव के बाद हारने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित कर अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है, जो केवल हाईकोर्ट के पास है। राज्य सरकार व प्रतिवादी के वकील ने कहा कि अपीलार्थी ने एक तरफ तो प्रेस्क्राइब्ड अथॉरिटी के आदेश को अपील में चुनौती दी है जो कमिश्नर के पास लंबित है, और दूसरी तरफ सहायक रजिस्ट्रार के आदेश को रिट याचिका में चुनौती दी है।
प्रतिवादी ने कहा, 148 वैध मतों की गिनती नहीं की गई थी, इसलिए सही तरीके से पुनर्गणना का आदेश दिया गया था। पुनर्गणना में अपीलार्थी 77 मतों से चुनाव हार गए थे। आवेदक ने पुनर्गणना के परिणाम को कभी चुनौती नहीं दी, इसलिए चुनाव प्रमाण पत्र के खिलाफ याचिका उचित नहीं थी। सहायक रजिस्ट्रार ने उनके नाम को रजिस्टर कर लिया है, और हस्ताक्षर भी प्रमाणित कर दिए गए हैं इसलिए आवेदक को कोई राहत नहीं दी जा सकती।
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