हरदोई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने निराशा व्यक्त की है। कांग्रेस और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस बजट को मध्यम वर्ग, किसानों और नौकरीपेशा लोगों के लिए ‘छलावा’ बताया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय ने बजट को कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से भटक गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य अमलेंद्र त्रिपाठी (एडवोकेट) ने बजट को ‘देश का बंटाधार’ करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बजट के बाद शेयर बाजार में गिरावट इसकी विफलता का प्रमाण है। त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि गाँव, किसान और खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट में सिंचाई, खाद और खेतिहर मजदूरों के उत्थान का कोई जिक्र नहीं है। बजट से केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि कर्मचारी संगठन भी निराश हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के जिलाध्यक्ष सुधीर गंगवार ने बताया कि नौकरीपेशा वर्ग को आयकर में बड़ी छूट की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी गहरी निराशा व्यक्त की। गंगवार के अनुसार, लंबे समय से आंदोलन कर रहे शिक्षकों को उम्मीद थी कि सरकार इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाएगी, लेकिन बजट में इसकी अनदेखी से कर्मचारियों का असंतोष और बढ़ गया है। हरदोई के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि बजट में महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है। शिक्षा क्षेत्र में बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा आवंटित न करना भविष्य की पीढ़ी के साथ अन्याय बताया जा रहा है।
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