कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशु चोरी की घटना पर बनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट में 26 नवंबर को ड्यूटी पर तैनात तीन डॉक्टरों समेत कुल 11 स्वास्थ्यकर्मियों को लापरवाही का दोषी ठहराया गया है। प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। रिपोर्ट की प्रतियां जिलाधिकारी और एसपी को भी भेजी गई हैं। घटना कैसे सामने आई 26 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड से प्रदीप चौधरी का नवजात शिशु अचानक गायब हो गया था। बच्चा 25 नवंबर को यहीं पैदा हुआ था। घटना के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई।अगले ही दिन, 27 नवंबर को पुलिस ने शिशु को पडरौना कोतवाली क्षेत्र के मनिकौरा, बिंद टोली महुअवा कुटी निवासी एक महिला के घर से बरामद कर लिया था। घटना के बाद प्राचार्य ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने एसएनसीयू वार्ड के रजिस्टर, प्रवेश-निकास विवरण और उस दिन की ड्यूटी पर्चियां जांचीं।टीम ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, डॉ. विजय कुमार सिंह, डॉ. रितेश कुमार सिंह, डॉ. कृष्ण मोहन सहित उपचारिकाओं और कर्मचारियों, राजेश्वरी, इंदू राय, कौशलेन्द्र, स्नेहा, मनोज, वार्ड आया उर्मिला, गार्ड राकेश और एक्स-आर्मी मैन धर्मेंद्र सिंह—से पूछताछ की।सभी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। किस लापरवाही पर फंसा स्टाफ जांच टीम ने साफ कहा कि वार्ड में तैनात प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी थी कि यह सुनिश्चित करें कि कौन व्यक्ति वार्ड में प्रवेश कर रहा है, वह किस बच्चे से जुड़ा है और कोई भी व्यक्ति बच्चे को बाहर न ले जा सके।रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह बेसिक सतर्कता बरती जाती, तो बच्चे के गायब होने की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। प्राचार्य ने घटना के दिन मौजूद सभी 11 कर्मचारियों कोसरकारी कर्तव्य के प्रति घोर अकर्मण्यता का दोषी बताते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
https://ift.tt/QFJd8qT
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply