काशी अब इंसानियत की मिसाल भी पेश कर रहा है। वाराणसी के हरहुआ क्षेत्र में स्थित ‘श्री काल भैरव डॉग अनाथालय’ बेसहारा, घायल और उपेक्षित कुत्तों के लिए एक ऐसा सुरक्षित घर बन गया है। लगभग एक बीघा भूमि पर बने इस अनाथालय में वर्तमान में करीब 200 देसी और पालतू कुत्ते संरक्षण में हैं। इनमें वे कुत्ते शामिल हैं जो किसी कारणवश अपने घरों से निकाल दिए गए या सड़क दुर्घटनाओं की वजह से घायल हो चुके थे। अनाथालय में कुत्तों की देखभाल के लिए आधुनिक और हाईटेक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहां छोटा ICU, समर्पित कुत्ता एंबुलेंस और हर समय सक्रिय रेस्क्यू टीम मौजूद रहती है। इलाज और दैनिक देखभाल की जिम्मेदारी करीब 10 लोगों की टीम और चिकित्सकों पर रहती है, जो घायल व बीमार कुत्तों की प्राथमिक और उन्नत चिकित्सा सुनिश्चित करते हैं। माथे पर तिलक और आरती करके आश्रम में होता है कुत्ते का प्रवेश इस अनाथालय की सबसे अनूठी विशेषता इसके धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष में दिखती है। यहां जब भी कोई नया कुत्ता रेस्क्यू कर लाया जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, माथे पर चंदन लगाया जाता है, और उसके स्वभाव के अनुसार उसे नया नाम दिया जाता है। प्रतिदिन तय समय पर भोजन, साफ-सफाई और नियमित देखभाल की व्यवस्था भी की जाती है, ताकि किसी भी कुत्ते को किसी तरह की परेशानी न हो। देश-विदेश के पर्यटक भी करते हैं पसंद अनाथालय की संस्थापक एवं संचालक सुदेशना बासु और सीईओ दिलीप सेन गुप्ता का मानना है कि यह प्रयास केवल सेवा नहीं, बल्कि जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश है। उनका उद्देश्य है कि समाज में पशु-सेवा को लेकर जागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक लोग बेसहारा कुत्तों की मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने बताया कि सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी आने वाले पर्यटक कुत्तों को काफी पसंद करते हैं यहां से कई ऐसे भी कुत्ते हैं जो विदेश गए हैं। हम मनुष्य की तरह उनकी भी सेवा करते हैं।
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