कायमगंज क्षेत्र के नगला मना गांव में शुक्रवार रात एक 43 वर्षीय युवक ने घर के सामने बबूल के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें पुलिस उत्पीड़न और बीमारी से तंग आकर आत्महत्या करने की बात लिखी गई है। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान नगला मना निवासी 43 वर्षीय प्रमोद कुमार यादव उर्फ रमजी के रूप में हुई है। पत्नी के अनुसार, शनिवार सुबह नींद खुलने पर उन्होंने पति का शव पेड़ से लटका देखा, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों में कोहराम मच गया। परिजनों का आरोप है कि प्रमोद के खिलाफ आर्म्स एक्ट का एक पुराना मुकदमा दर्ज था। कोर्ट में पेश न होने के चलते हाल ही में पुलिस ने उनके घर कुर्की की कार्रवाई की थी। आरोप है कि कुर्की के दौरान घरेलू बर्तन तक उठा लिए गए, जिससे प्रमोद मानसिक रूप से टूट गया था। परिजनों के अनुसार इसी तनाव के चलते वह गंभीर रूप से बीमार भी हो गया था। मृतक की जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा है—”मैं प्रमोद कुमार, टीवी का मरीज हूं। पुलिस मुझे रोज परेशान करती है। हमारे पास खाने तक को नहीं है। पुलिस के दबाव में आकर मैं आत्महत्या कर रहा हूं।” सूचना मिलने पर फॉरेंसिक टीम और सीओ राजेश कुमार द्विवेदी मौके पर पहुंचे और साक्ष्य एकत्र किए। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रमोद तीन भाइयों में अकेला जीवित था। उसके दोनों भाइयों, माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। घटना के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष अलग है। अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मृतक पढ़ा-लिखा नहीं था, ऐसे में जेब से मिला सुसाइड नोट संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि प्रमोद के खिलाफ कोर्ट से कुर्की वारंट जारी था, जिसके अनुपालन में पुलिस 19 दिसंबर को उसके घर गई थी। वह काफी समय से बीमार भी चल रहा था। एएसपी का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से किसी अन्य व्यक्ति ने सुसाइड नोट लिखकर मृतक की जेब में रखा हो सकता है। सुसाइड नोट की लिखावट की जांच कराई जा रही है। मामले की निष्पक्ष जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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