कानपुर देहात के रुरा क्षेत्र के सिठमरा गांव के जूनियर विद्यालय में वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करना था। प्रधानाध्यापक शनेन्द्र सिंह तोमर ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि वंदे मातरम् गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में लिखना शुरू किया था। इसकी रचना 7 नवंबर 1875 को पूरी हुई थी। उन्होंने आगे बताया कि इसे पहली बार 1882 में बंगाली उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया था। गीत के पहले दो छंद संस्कृत में हैं, जबकि शेष छंद बंगाली में लिखे गए थे। इसे 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया। सहायक अध्यापक नवीन कुमार दीक्षित ने कहा कि वंदे मातरम् भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। यह देश के इतिहास, संस्कृति और मूल्यों को दर्शाता है। यह गीत मातृभूमि की प्रकृति, शक्ति, समृद्धि, ज्ञान और दिव्यता की स्तुति करता है। इसे दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसी देवियों के रूप में प्रस्तुत करता है। सुलेख प्रतियोगिता में कामिनी, नैंसी, प्रांजल शुक्ला, अर्जुन शुक्ला, हिमांशु सिंह, कृष्णा, आर्यन, प्रिंस, दीपिका, प्रियंका, शिखा और आदर्श हर्षित सहित कई बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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