कानपुर में गंगा किनारे 350 किलो की मरी हुई डॉल्फिन मिली है। स्थानीय नाविकों ने शुक्रवार शाम 5 बजे डॉल्फिन को उतराते हुए देखा। पास जाकर देखा तो पता चला कि वह डॉल्फिन है। नाविकों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि गंगा में प्रदूषण की वजह से डॉल्फिन की मौत हुई है। जहां शव मिला, वहां जाजमऊ क्षेत्र में सबसे ज्यादा टेनरियों का प्रदूषित पानी गंगा में गिरता है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही मौत की वजह साफ हो सकेगी। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया- डॉल्फिन की लंबाई 10 फीट है। शव 2 से 3 दिन पुराना लग रहा है। डॉल्फिन को वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय को सौंप दिया गया है। 2 तस्वीरें देखिए- डाल्फिन की उम्र करीब 30 साल होती है
केंद्र सरकार ने भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। इसे स्थानीय स्तर पर ‘जलपरी’ भी कहा जाता है। गंगा नदी में डॉल्फिन की उपस्थिति को ‘मिशन क्लीन गंगा’ की सफलता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। डॉल्फिन की औसत आयु लगभग 30 वर्ष होती है। इससे पहले चार साल में चार डॉल्फिन की मौत
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI) ने भारत की नदियों में डॉल्फिन की संख्या जानने के लिए साल–2024 में सर्वे किया। 3 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने इसके आंकड़े जारी किए। गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 6324 पाई गई। जबकि बिजनौर से नरौरा बैराज तक इनकी संख्या 52 दर्ज की गई। 2023 में ये संख्या 50 थी। यानि बीते एक साल में दो डाल्फिन बढ़ी हैं। साल–2020 से 2024 तक मेरठ और बुलंदशहर जिले में चार डॉल्फिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इनकी मौत का कारण आज तक स्पष्ट नहीं हुआ है। खतरनाक केमिकल से डॉल्फिन पर संकट
गंगा में जीवों पर संकट की कई वजह दिखाई देती हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के एक हालिया सर्वे में पता चला है कि गंगेय डॉल्फिन जिन छोटी मछलियों का शिकार करती हैं, वो मछलियां खतरनाक केमिकल के संपर्क में हैं। इस तरह ये केमिकल डॉल्फिन के पेट में पहुंच रहा है। बीते चार साल में मेरठ और बुलंदशहर में चार डॉल्फिन की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। आज तक इनकी मौत की सही वजह पता नहीं चल सकी। इसके अलावा बिजनौर से लेकर मेरठ, बुलंदशहर और आगे तक गंगा के खादर इलाके में जो फसल उगती है, उसमें केमिकल का प्रयोग होता है। ये केमिकल पानी के सहारे बहकर गंगा में पहुंच जाते हैं। इससे भी जलीय जीवों को खतरा रहता है। —————————————– ये खबर भी पढ़िए- कानपुर में 48 घंटे बाद कड़ाके की ठंड की चेतावनी: 64 को हार्ट अटैक आया, 861 मरीज पहुंचे; हमसफर ट्रेन 26 घंटे लेट कानपुर शहर में आज शनिवार को मौसम साफ है। कोहरा न होने के चलते विजिबिलिटी सामान्य रही। हालांकि, बर्फीली हवा से गलन पड़ रही है। लोग ठंड से राहत पाने के लिए अलाव के पास बैठे दिखे। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आज दिन में धूप निकल सकती है, लेकिन उत्तर पश्चिमी बर्फीली हवा के चलते रात और शाम का पारा गिरेगी। पढ़ें पूरी खबर…
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