कानपुर का ईदगाह चौराहा अब लगातार धंस रहा है। शरुआत में इस गड्डे की गहराई केवल 12 फिट थी। लेकिन 3 दिनों के बाद इस गड्डे की गहराई 20 फिट हो गई और मकान धसने का खतरा बना हुआ है। ईदगाह चौराह पर मिट्टी लगातार सड़क दरक रही है। अब इस गड्डे की लंबाई लगभग 25 मीटर हो गई है। लोग इस गड्डे को अब मौत का कुआं कह रहे हैं। लोग यहां आकर अब सेल्फी ले रहे हैं। यह पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। गड्डा बना मौत का कुआं, पिकनिक करने लोग आ रहे जब कोई प्रशासन या नगर निगम से जब कोई अधिकारी आता है, तो काम जल्दी से होने लगता है, उस समय तो ऐसा लगता है ये काम 15 दिनों में खत्म हो जाएगा। लेकिन जब अधिकारी चले जाते है तो फिर काम की स्पीड कम हो जाती है। अब ये ईदगाह का गड्डा पिकनिक स्पॉट बन गया है, यहां सब नेता और अधिकारी फोटो खिंचवाने आते है। अब यहां मिट्टी और धंस रही है, लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है। मेरी जिला अधिकारी से मांग है जल्द से जल्द मौके पर आ कर निरीक्षण करें। अगर अधिकारी समय से काम नहीं करेंगे तो ये गड्डा मौत का कुआं बन जाएगा है। जब कोई अप्रिय घटना हो जाएगी तब शासन और प्रशासन संज्ञान लेता है। अगर प्रशासन ने समय से ध्यान नहीं दिया तो हम लोगों का भरोसा उठ जाएगा। लगातार दरक रही सड़क, 10 फिट गड्डा फिर बढ़ा
कल से अब तक करीब 1 0 फिट मिट्टी और धंस चुकी है। अब गड्डे की लगातार लंबाई बढ़ रही है। ये गड्डा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। लेकिन यहां काम के नाम पर केवल पिलर लगाए गए है। ये लोग काम दिखाने के लिए गढ्डे में गड्डा कर रहे है। हम लोग यहां के दहशत में बैठे हुए है। प्रशासन, जलकल और नगर निगम सभी को पता है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अधिकारी आते फोटो खिंचवा के चले जाते
समीर कुमार बताते है, यहां पर लोग आकर के फोटो खिंचावते है और चले जाते है। नेता लोग आते है, मीडिया से फोटो खिंचवाते है उसके बाद में काम होना बंद हो जाता है। मेरे दोस्त का इस गड्डे में गिर के सिर फूट गया है। कब अधिकारी आते है तभी काम होना शुरू हो जाता है, उनके जाने के बाद काम होना बंद हो जाता है। कानपुर के नाले 150 साल पुराने पार्षद आलोक पाण्डेय कहते है, महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों को गंभीरता से देखना चाहिए। फिलहाल अभी इस समस्या का जल्दी से समाधान हो जाए, आगे फिर हम लोग भगवान भरोसे ही है। जबकि सरकार के द्वारा इतना फंड आता है। जबकि इनको पहले से मालूम है, ये अंग्रेजों के जमाने का डाट नाला है। जब ये नाले क्षतिग्रस्त हो रहे है, तो पहले से इनकी कार्ययोजना बनानी चाहिए थी। अगर ये लोग समय रहते सुधार करते तो ऐसी घटनाए न होती। सैकड़ों करोड़ रुपए सरकार देती है, जिसको महापौर अपने विवेक अनुसार खर्च कर सकती हैं। अगर ये बृहमनगर चौराहा से ईदगाह चौराहा या रामबाग हो। ये अंग्रेजों के जमाने का है तो इसके लिए इंजीनरों से बात करके एक कार्ययोजना बनाए। अगर ये हर साल मानक टी करके समस्या का समाधान कर दें तो पूरा हो जाएगा। कानपुर में अभी और धसेंगे नाले अभी यहां पर लाइन डाल के काम शुरू कर देंगे, लेकिन आगे डाट नाला धंस जाएगा उसके बाद फिर कहीं और पर ऐसी स्थिति आएगी। हम लोग जानकर के अनजान बने हुए हम लोगों के ऊपर भगवान की दया है। यहां से बच्चों की स्कूली बसें गुजरती हैं। यहां से अगर बस के गुजरते वक्त सड़क धंस जाए तो बहुत बड़ी जनहानि हो सकती है। मेरी दोबारा से मांग है, जहां- जहां अंग्रेजों के जमाने के डाट नाले हैं, इसके लिए चाहें सरकार से बात करके फंड लें। इसके ये सुव्यवस्थित ढंग में काम करवाए। मेयर ने 15 दिनों में काम करने दिये थे निर्देश कानपुर मेयर प्रमिला पांडेय ने बीते दिनों ईदगाह चौराहा पर धंसी हुई सड़क का निरीक्षण किया था, इस दौरान मेयर ने 15 दिनों में काम पूरा करने के निर्देश दिये थे। लेकिन स्थानीय लोगों ने काम में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
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