बाराबंकी जनपद के सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पंजरौली मैलारैगंज गांव के एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसकी जीवित मां और चाचा को सरकारी कागजों में ‘मृत’ दिखाकर वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए गए हैं। पीड़ित परिवार ने न्याय और मताधिकार की बहाली के लिए गुहार लगाई है। यह मामला गुरुवार को पूर्व सांसद पीएल पुनिया और सांसद तनुज पुनिया के आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आया। पीड़ित परिवार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए न्याय की मांग की। युवक शिवकुमार वर्मा की वृद्ध माता लज्जावती ने स्वयं प्रेस वार्ता में उपस्थित होकर बताया, “हम जीवन भर वोट देते आए हैं, लेकिन अब हमें जीवित रहते हुए भी मृत घोषित कर दिया गया है। हमारी देवरानी का नाम भी इसी तरह लिस्ट से हटा दिया गया है। हमें नहीं पता यह क्यों किया गया, लेकिन हम चाहते हैं कि हमें वापस ‘जीवित’ किया जाए और हमारा वोट देने का हक न छीना जाए।” पीड़ित शिवकुमार वर्मा ने बताया कि वह इस धांधली को लेकर एसडीएम, खंड विकास अधिकारी और सुपरवाइजर के पास कई बार जा चुका है। शिवकुमार के अनुसार, अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि रोलबैक प्रक्रिया के जरिए ड्रॉप लिस्ट आने से पहले नाम जोड़ दिए जाएंगे, लेकिन जब नई लिस्ट आई तो उसकी मां और चाचा अभी भी ‘मृतक’ की श्रेणी में ही दर्ज थे। युवक ने मीडिया के सामने एक वॉट्सएप चैट का प्रिंटआउट भी रखा। इसमें कथित तौर पर एक कर्मचारी द्वारा प्रशासनिक स्तर पर फर्जी फॉर्म 7 होने की जानकारी बताई जा रही है। हालांकि, यह पूरी प्रेस वार्ता कांग्रेस नेता के आवास पर हुई और आरोप एक पक्षीय हैं। इस मामले में अभी तक तहसील प्रशासन या निर्वाचन विभाग की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि आखिर किस तकनीकी चूक या वजह से जीवित लोगों को मृतक दिखाकर नाम काटे गए और बार-बार शिकायत के बाद भी सुधार क्यों नहीं हुआ।
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