संगम की रेती पर चले माघ मेले में कल्पवासियों का कल्पवास आज रविवार को पूरा हो गया। तीन जनवरी यानी पौष पूर्णिमा से कल्पवासियों का कल्पवास संगम क्षेत्र में शुरू हुआ था जो आज एक फरवरी को यानी माघी पूर्णिमा के दिन पूरा हो गया। आज अंतिम स्नान करके कल्पवासी अपने अपने घरों को लौटने लगे हैं। दोपहर बाद से ही यह प्रक्रिया शुरू हो गई थी। कल्पवासियों के जाने के बाद काफी हद तक मेले में भीड़ काफी कम हो जाएगी। प्रतिदिन की अपेक्षा आज मेला क्षेत्र से बाहर निकलने वालों की संख्या ज्यादा दिखी। इसमें ज्यादातर कल्पवासी ही हैं जो अपने अपने सामान समेट कर लौट रहे हैं।
कल्पवासी घर लेकर जाते हैं तुलसी दरअसल, जब कल्पवास का संकल्प पौष पूर्णिमा को शुरू होता है तो वह अपने शिविर के बाहर जौ बोते हैं। इसके साथ ही तुलसी का बिरवा रोपते हैं। इसमें ज्यादातर कल्पवासी ऐसे होते हैं जो अपने घर से ही गमले में तुलसी का पौधा लाते हैं। जब माघी पूर्णिमा पर उनका कल्पवास पूरा होता है तो वह कल्पवासी उगी हुई जौ और तुलसी को या तो पूजन के बाद गंगा में प्रवाहित करते हैं या फिर तुलसी को अपने घर ले जाकर साल भर पूजा अर्चन करते हैं। 12 साल का कल्पवास पूरा कर चुके कल्पवासी यहां शैयादान भी करके यहां से रवाना हो हुए हैं। कुछ ऐसे भी कल्पवासी होते हैं जो त्रिजटा स्नान करने के लिए भी यहां रूके रहते हैं।
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