लखनऊ के गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी में तीन दिवसीय कबीर महोत्सव 2025 का दूसरा दिन कला, संगीत और साहित्य को समर्पित रहा। आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष महोत्सव में समाज के सभी वर्गों, उम्र और लिंग के लोगों ने भाग लिया।दूसरे दिन की शुरुआत युवा पॉडकास्ट ‘द बज़ बॉक्स’ से हुई, जिसे कुलजीत ने प्रस्तुत किया। इसके बाद कार्यशाला के दूसरे सत्र ‘समझो सिनेमा’ में साहित्य और फिल्म के संबंधों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में मीडिया से जुड़ा सत्र ‘बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी’भी आयोजित किया गया। इसमें प्रसिद्ध मीडिया व्यक्तित्व सुधीर मिश्रा, आनंद वर्धन और दया शंकर शुक्ला सागर ने हिस्सा लिया। इसके बाद दिल्ली के जामिया थिएटर ग्रुप के छात्रों ने ‘आर्ट फॉर आरोग्य’ नामक नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रदूषण के मुद्दों को उठाया गया। मुख्य आकर्षण सूफी-कबीर संगीत कार्यक्रम रहा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद शाम को मुशायरा ‘जश्न-ए-अदब’ का आयोजन हुआ। इसमें सलीम सिद्दीकी, बलवंत सिंह, अहमद अयाज़, शाहबाज़ तलीब, वंदना वर्मा अनम, पीयूष अग्निहोत्री और शश्वत सिंह दर्पण जैसे कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।शाम का मुख्य आकर्षण सूफी-कबीर संगीत कार्यक्रम ‘मोहब्बत के मायने’ रहा। इसे लेखक, गायक, नर्तक और कथाकार विपुल रिक्खी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कबीर और सूफी संगीत के जरिए प्रेम के विभिन्न रूपों—दैवीय, मानवीय, विद्रोही और करुणामय—को दर्शाया। साहित्य के माध्यम से सामाजिक संदेश दिन का समापन ज्योति डोगरा के नाटक ‘मास’ से हुआ। यह नाटक महिलाओं को सौंदर्य से जुड़े मिथकों की पहचान कराता है और पुरुषों को पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण से अवगत कराता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित व्यंग्यात्मक नाटक है।महोत्सव की संयोजक संगीता जायसवाल ने बताया कि कबीर महोत्सव 2025 का उद्देश्य कला, संगीत, थिएटर और साहित्य के माध्यम से सामाजिक संदेशों और मानवता की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाना है।
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