कन्नौज में आलू का भंडारण शुरू हो गया है। हालांकि, कोल्ड स्टोरेज में आलू के भंडारण के लिए दरें पहले से निर्धारित नहीं हैं, जिससे किसानों को मनमाना किराया चुकाना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए छत्रपति शिवाजी सेना के सदस्यों ने जिलाधिकारी (डीएम) को ज्ञापन सौंपा है। खेतों में नए आलू की खुदाई शुरू हो चुकी है और किसान अपनी उपज को कोल्ड स्टोरेज में भंडारित कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इसका उद्देश्य आलू को खराब होने से बचाना है। लेकिन, कोल्ड स्टोरेज मालिकों द्वारा पहले से भाड़ा तय न करने के कारण किसानों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को छत्रपति शिवाजी सेना के सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण की दरें पहले से तय की जाएं, ताकि किसानों के साथ अन्याय न हो। संगठन के संस्थापक बाबा राधेश्याम पटेल ने बताया कि कोल्ड मालिक पहले से किराया तय नहीं करते और बाद में किसानों से अधिक शुल्क वसूलते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से आलू भंडारण का शुल्क निर्धारित करने की अपील की, ताकि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े। पटेल ने पिछले वर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ कोल्ड स्टोरेज में सादा आलू के लिए 100 रुपये प्रति पैकेट और ऊर्जा आलू के लिए 120 रुपये प्रति पैकेट वसूले गए थे। वहीं, कई अन्य कोल्ड स्टोरेज में सादा आलू के लिए 150 से 165 रुपये प्रति पैकेट और ऊर्जा आलू के लिए 170 से 180 रुपये तक वसूले गए, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। संगठन ने मांग की है कि सभी कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण के लिए समान भाड़ा तय किया जाए और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
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