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ऑस्ट्रेलिया से मेडल लेकर लौटे मेरठ के पैरा एथलीट:बोले -एशियन पैरा गेम्स 2026 हमारा लक्ष्य, घर में नहीं मैदान में बनेगा मेडल

ऑस्ट्रेलिया में आयोजित समर डाउन अंडर सीरीज – कैनबरा ट्रैक मीट 2026 में मेरठ के पैरा एथलीट अनमोल वशिष्ठ और प्रियांश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पदक जीतकर देश और शहर का नाम रोशन किया। इंटरनेशनल पैरा एथलीट अनमोल वशिष्ठ (कैटेगरी F-55) ने कैनबरा ट्रैक मीट में डिस्कस थ्रो में गोल्ड और शॉटपुट में सिल्वर मेडल जीता। अनमोल इससे पहले 2022 में मेक्सिको में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2025 में नई दिल्ली में हुए वर्ल्ड ग्रांड प्री में उन्होंने शॉटपुट में सिल्वर और जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वहीं, चेन्नई में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में भी वे स्वर्ण पदक विजेता रहे। अनमोल बताते हैं कि पैरा स्पोर्ट्स को चुनने के पीछे उनका मकसद समाज की सोच बदलना था दिव्यांगों को आज भी कमजोर नजरों से देखा जाता है। मैं यह साबित करना चाहता था कि व्हीलचेयर पर रहकर भी देश के लिए मेडल जीते जा सकते हैं। उन्होंने शुरुआती संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि सही कोचिंग, खान-पान और ट्रेनिंग की जानकारी नहीं थी, लेकिन मेरठ के कोच रोबिन कुमार के मार्गदर्शन और एडीपी एनजीओ के सहयोग से उनकी परफॉर्मेंस में बड़ा बदलाव आया। संघर्ष कर रहे पैरा खिलाड़ियों के लिए अनमोल का संदेश था कि वे घर में सीमित न रहें, ग्राउंड और जिम जाएं, खुद को एक्टिव रखें और आत्म-विश्वास के साथ आगे बढ़ें।
भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य सितंबर 2026 में जापान में होने वाले एशियन पैरा गेम्स हैं। वहीं, पैरा एथलीट प्रियांश ने बताया कि वे पढ़ाई के लिए मेरठ आए थे। अखबार में पैरा स्पोर्ट्स के बारे में पढ़ने के बाद उन्हें इस क्षेत्र की जानकारी मिली। न परिवार को खेलों की जानकारी थी और न ही आर्थिक स्थिति मजबूत थी। कई मुश्किलें आईं, लेकिन एडीपी एनजीओ के सहयोग से आगे बढ़ सका। प्रियांश ने कहा कि स्कूल स्तर पर खेलों को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। “स्कूलों में नियमित गेम्स पीरियड होने चाहिए और बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि पैरा स्पोर्ट्स में भी भविष्य है।” उन्होंने संघर्ष कर रहे युवाओं से अपील की कि “अगर खेलना है तो हिम्मत करके मैदान में उतरना होगा, समाज की बाधाओं को पार कर अपने लिए आगे आना पड़ेगा।” खिलाड़ियों के कोच रोबिन कुमार ने मेरठ में पैरा खिलाड़ियों की सुविधाओं पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, इन खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस इंटरनेशनल लेवल की है, लेकिन ग्राउंड और सुविधाएं ठीक नही हैं। 15–20 किलोमीटर दूर से खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए आते हैं। यहां कोई सपोर्ट स्टाफ नहीं है, गोला पकड़ाने से लेकर थ्रो सेट कराने तक सब कुछ मुझे ही करना पड़ता है। कोच रोबिन का कहना है कि “अगर इन्हें थोड़ा सा भी और सपोर्ट मिल जाए—बेहतर ग्राउंड, जिम और इक्विपमेंट—तो पैरालिंपिक या ओलंपिक में मेडल से इन्हें कोई नहीं रोक सकता।”


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