रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड में हैं। शुक्रवार को देहरादून पहुंचे राजनाथ सिंह ने आज मसूरी के लालबहादुर शास्त्री प्रशासनिक प्रशिक्षण अकादमी (लबासना) में प्रशिक्षण पूरा कर रहे आईएएस अधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा- हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में जिस तरह मॉक ड्रिल्स आयोजित की गईं और लोक सेवकों ने उसे सफल बनाया, वह प्रशासन की दक्षता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंपों को तबाह किया था, लेकिन भारत ने संतुलित तरीके से जवाब दिया। हालांकि, स्थिति को सामान्य नहीं रहने दिया गया। उन्होंने नए अधिकारियों से कहा कि भविष्य में किसी भी चुनौती के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा- सोशल मीडिया का इस्तेमाल वास्तविक बदलाव लाने के लिए होना चाहिए, न कि अपनी खुद की छवि दिखाने वाली रील्स बनाने के लिए। आपकी असली पहचान लोग बनाएंगे, फॉलोअर्स नहीं। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कही 5 बड़ी बातें… 1. ऑपरेशन सिंदूर में मॉक ड्रिल—‘आदर्श लोक सेवक’ का उदाहरण मसूरी में स्थित LBSNAA में आयोजित 100वें फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंप नेस्तनाबूद किए। भारत ने पूरी तरह संतुलित और गैर-उत्तेजक प्रतिक्रिया दी, लेकिन पाकिस्तान के रवैये के कारण सीमा पर हालात सामान्य नहीं रहे। उन्होंने कहा कि इस दौरान देशभर में हुए मॉक ड्रिल्स को प्रशासनिक अधिकारियों ने जिस तरह जनता तक समझाया और सफल बनाया, वह इस बात का प्रमाण है कि वे सच्चे लोक सेवक हैं। उन्होंने प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों से कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी आपात स्थिति के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार रखें। 2. सोशल मीडिया का उपयोग-‘रील्स नहीं असली बदलाव लाओ’ उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का प्रयोग आत्म-प्रदर्शन या रील्स बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। अधिकारी सोशल मीडिया पर “गुमनामी” के सिद्धांत को याद रखें। असली छवि फॉलोअर्स नहीं बनाते, आपकी असली पहचान जनता के बीच किए गए कामों से बनती है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी साधन है, लक्ष्य नहीं। इसका उपयोग पब्लिक आउटरीच, पारदर्शिता, एक्सेसिबिलिटी और वेलफेयर बढ़ाने में होना चाहिए। 3. ‘आप अफसर नहीं, लोक सेवक हैं’ राजनाथ सिंह ने कहा कि सिविल सेवक “नौकरशाह” नहीं, बल्कि “लोक सेवक” हैं। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी के हर फैसले से करोड़ों लोगों का जीवन, उम्मीदें और भविष्य जुड़ा होता है। इसलिए निर्णय लेते समय जनसेवा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने IAS अधिकारियों से कहा- “आपके कदम भारत का भविष्य तय करेंगे।” 4. सत्ता कमजोर को भ्रष्ट करती है, मजबूत को नहीं अकादमी के आदर्श वाक्य “शीलं परम पूज्यम्” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चरित्र, सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण किसी भी सिविल सेवक की नींव है। राजनाथ ने कहा “अक्सर कहा जाता है कि सत्ता भ्रष्ट करती है। लेकिन शक्ति केवल कमजोर को भ्रष्ट करती है; मजबूत लोग शक्ति का उपयोग दूसरों के भले के लिए करते हैं।” उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि असली शक्ति शोर में नहीं, खामोशी से बड़े बदलाव लाने में है। 5. सहानुभूति, संवेदना और मानवता, यही बनाएगी एक ‘अच्छा लोक सेवक’ उन्होंने कहा कि आज के सिविल सेवकों से उम्मीद है कि वे नीतियां बनाते और लागू करते समय जनता की आकांक्षाओं के प्रति जवाबदेह हों। वंचित और कमजोर वर्गों से मिलते समय सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए, क्योंकि उनकी वर्तमान स्थिति केवल उनकी क्षमता नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम होती है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे अधिकारी चाहिए जो केवल बदलाव की बात न करें, बल्कि उसके लिए कार्य भी करें, यही भाव आपको एक सक्षम, सशक्त और प्रभावी लोक सेवक बनाएगा।
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