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ऑनलाइन गेम में 60 लाख गंवाकर किशोर एम्स में भर्ती:गोरखपुर में आत्महत्या की धमकी देकर पिता से लेता रहा रुपए, अस्पताल में भी ऑनलाइन ट्रेडिंग करने की जिद कर रहा है किशोर

ऑनलाइन गेमिंग की लत शराब से भी अधिक खतरनाक साबित हो रही है। इसकी वजह से किशोर और युवा लाखों रुपए गंवा रहे हैं और आत्महत्या तक का प्रयास कर रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में ऐसे कई मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन पर गेम खेलकर टास्क पूरा करने पर दिमाग में डोपामाइन हार्मोन अधिक मात्रा में स्रावित होता है। इससे खुशी का स्तर बढ़ता है और व्यक्ति अगले टास्क को पूरा करने में जुट जाता है। जैसे-जैसे टास्क पूरे होते हैं, दिमाग को डोपामाइन की आदत पड़ जाती है। जब यह हार्मोन नहीं मिलता तो गेम खेलने वाले का मन किसी अन्य कार्य में नहीं लगता, वह उदास रहने लगता है और कभी-कभी गेम खेलने के लिए हिंसक भी हो जाता है। यदि गेम रुपए वाला हो या ऑनलाइन ट्रेडिंग हो तो लत और ज्यादा बढ़ जाती है। मोबाइल फोन में गेम खेलने की बढ़ती लत के शिकार किशोर और युवा एम्स के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना आते हैं। कोई आनलाइन ट्रेडिंग में लाखों रुपए गंवाने के बाद भी खुद को नहीं रोक पा रहा है तो कोई टास्क पूरा करने के चक्कर में आत्महत्या की कोशिश से भी गुरेज नहीं कर रहा है। 60 लाख रुपए गंवा चुका है किशोर गोरखपुर का रहने वाले एक किशोर को पहले आनलाइन गेम खेलने की लत लग गई। वह दिन भर मोबाइल फोन देखता रहता था। घर वालों ने किसी तरह किशोर को बातचीत कर गेम के दुष्प्रभावों को बताया तो उसने आनलाइन ट्रेडिंग शुरू कर दी। अपने पिता के नाम से डीमैट अकाउंट बनाया। इसके बाद छह महीने में रकम दोगुणा करने की बात कहते हुए पिता से पांच लाख रुपए मांगना शुरू किया। पिता ने रुपए देने से मना किया तो किशोर पहले तो खूब रोता था। बाद में उसने आत्महत्या की धमकी देनी शुरू कर दी। पिता ने उसे पांच लाख रुपए दिए। किशोर रुपए हार गया। इसके बाद उसने फिर रुपये मांगे। पिता ने मना किया तो उसने कहा कि इस बार वह 10 लाख रुपए कमाएगा। फिर आत्महत्या की धमकी देना शुरू किया। यह रुपए भी वह हार गया। ऐसे करते हुए वह 60 लाख रुपए हार चुका है। पूरा परिवार परेशान है। किशोर को लेकर उसके चाचा एम्स पहुंचे तो भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। अभी किशोर ठीक है, लेकिन बीच-बीच में अचानक वह ट्रेडिंग शुरू करने की जिद पकड़ने लगता है। इसके बाद उसे फिर डॉक्टर के पास लेकर आया जाता है।

कम उम्र में बच्चों को कमाई की आदत डालना खतरनाक आनलाइन गेम से कमाई की आदत कम उम्र में बच्चों पर बुरा असर डाल रही है। बच्चों को लगता है कि वह खुद अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। इस आदत को छुड़ाने की हर कोशिश को वह बहुत खराब मानते हैं और ऐसा करने वालों के खिलाफ हिंसा से भी गुरेज नहीं करते हैं।

बड़े बच्चे का करते हैं अनुकरण छोटे भाई-बहन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे परिवार जहां अभिभावक बहुत व्यस्त रहते हैं, उनके पास बच्चों के लिए समय नहीं होता, वहां सबसे बड़े बच्चे का अनुकरण ज्यादातर छोटे भाई-बहन करते हैं। बड़ा बच्चा यदि मोबाइल फोन में गेम खेलने या फोन देखने का आदती है तो अन्य भी यही करते हैं।

ये हैं नुकसान बच्चों के लिए अधिकतम दो घंटे का स्क्रीन टाइम फिक्स हो गोरखपुर एम्स के न्यूरो न्यूरो साइकेट्रिस्ट डा. राशिद आलम ने बताया कि छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिदिन एक घंटे से कम और बड़े बच्चों के लिए स्कूल के दिनों में 30-60 मिनट तथा छुट्टियों में अधिकतम दो घंटे का स्क्रीन टाइम निर्धारित करना होगा। बच्चे मोबाइल फोन में क्या कर रहे हैं, यह देखना अभिभावक की जिम्मेदारी है। बच्चों को शारीरिक खेल के लिए प्रोत्साहित करें और खुद भी उनके साथ खेलें। आनलाइन गेम में टास्क पूरा करना शराब से भी ज्यादा नशा देता है, इसलिए ऐसे गेम से बच्चों को बचाएं। यदि बच्चा जिद कर रहा है या धमकी दे रहा है तो विशेषज्ञ डाक्टर को ही दिखाएं।


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