एलएलआर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग ने हाल ही में दो अत्यंत चुनौतीपूर्ण नेत्र सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। दोनों मरीज गंभीर कॉर्निया संक्रमण से पीड़ित थे, जिसके कारण उनकी आंखों की काली पुतली (कॉर्निया) में छेद हो गया था। यह स्थिति आंखों के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि इससे अंदरूनी तरल पदार्थ बाहर निकलने लगता है और स्थायी रूप से रोशनी जाने का खतरा रहता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने पहले मामले के बारे में बताया। एक मरीज की आंख में लगभग 2 मिलीमीटर का छेद था। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने एक विशेष मेडिकल ग्लू का उपयोग करके छेद को सील किया। ग्लू लगाने के बाद, आंखों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उस पर बैंडेज कॉन्टैक्ट लेंस लगाया गया। इस उपचार से न केवल संक्रमण को नियंत्रित किया गया, बल्कि मरीज की दृष्टि में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। डॉ. मोहन के अनुसार, यह कम समय में होने वाली और पूरी तरह सुरक्षित सर्जरी है। दूसरे मरीज की स्थिति अधिक गंभीर थी, उनकी आंख में लगभग चार मिलीमीटर का छेद था। इस मामले में, डॉक्टरों ने डोनेशन से प्राप्त कॉर्निया का उपयोग करके ‘पैच ग्राफ्ट’ लगाया। इस कॉर्निया पैच ग्राफ्ट को टांकों की मदद से सुरक्षित किया गया। लगभग 20 से 25 मिनट तक चली इस सर्जरी के बाद, मरीज की आंखें पूरी तरह सुरक्षित हो गईं और उनकी आंखों की रोशनी भी वापस आ गई। डॉ. शालिनी मोहन ने यह भी बताया कि विभाग अब नियमित रूप से कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर रहा है, जिसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने मरीजों को सर्जरी के बाद विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी, जैसे आंखों में पानी न जाने देना, डॉक्टर द्वारा बताए गए ड्रॉप्स नियमित रूप से डालना और किसी भी तरह की चोट से आंखों को बचाना। नेत्र रोग विभाग की यह उपलब्धि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला रही है।
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