गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में सोमवार को एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जिसने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंची एक महिला की रजिस्ट्रेशन लाइन में ही तबीयत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। छीजारसी गांव निवासी 56 वर्षीय मिथिलेश को सोमवार सुबह से ही सीने में तेज दर्द की शिकायत थी। इसके साथ ही उन्हें अचानक तेज गर्मी लगने लगी और उल्टियां भी शुरू हो गईं। हालत बिगड़ती देख परिजन बिना देर किए उन्हें इलाज के लिए जिला एमएमजी अस्पताल लेकर पहुंचे। मृतका की बेटी काजल ने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे अपनी मां को लेकर अस्पताल पहुंची थी। इलाज के लिए पर्ची बनवाने के लिए वह रजिस्ट्रेशन काउंटर की लाइन में लग गई। अस्पताल में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उसे करीब 45 मिनट से अधिक समय तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान मिथिलेश पास ही खड़ी थीं और लगातार कमजोरी महसूस कर रही थीं। परिजनों के अनुसार, लंबा इंतजार और बिगड़ती तबीयत के चलते मिथिलेश अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। यह देखते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत काजल को बुलाया और अस्पताल कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाई। आसपास मौजूद लोगों की सहायता से महिला को तत्काल इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया। मृतका के बेटे सुरेश चंद श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उनकी मां की हालत पहले से गंभीर थी, लेकिन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल सका। इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बाद ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर डॉ. बृजेश ने करीब 11 बजकर 25 मिनट पर जांच के बाद मिथिलेश को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों ने भी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए अलग से त्वरित पर्ची और तत्काल इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
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