‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट हर हाल में होना चाहिए। कई सरकारों ने इसके लिए इनिशियेटिव लिए हैं। हमारी सरकार को भी आगे आना चाहिए। जब आप मेडिकल से जुड़े समुदाय के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट ला सकते हैं तो अधिवक्ताओं के लिए क्यों नहीं ? वकील सबसे अधिक सोसाइटी को रिप्रजेंट करता है। ऐसे में यह एक्ट हर हाल में लागू होना चाहिए।’ ये कहना है भारत सरकार के स्पेशल स्टैंडिंग काउंसिल अरुण मिश्रा का; वाराणसी कचहरी में द बनारस बार एसोसिएशन के चुनाव के पहले वकीलों ने एक बार फिर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का मामला उठा दिया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग किया कि हर हाल में सरकार इसे लागू करे ताकि वकील बिना भय के अपने वादी के लिए कोर्ट में उसके हक के लिए लड़ सके। आखिर सरकार की मंशा किया है और क्या आवश्यकता है इस प्रोटेक्शन एक्ट की। इस संबंध में दैनिक भास्कर ने वाराणसी कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बातचीत की और उनका मत जाना। पढ़िए रिपोर्ट… अधिवक्ता को डर या भय में काम न करना पड़े पूर्व चेयरमैन मेंबर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश सीनियर अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी एडवोकट प्रोटेक्शन एक्ट पर बोलते हुए कहा – वकील कोर्ट में किसी गरीब या वादकारी के लिए खड़ा होता है। ऐसे में उसकी संपत्ति, घर और परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार को प्रोटेक्शन एक्ट बनाकर लेनी होगी ताकि वह निर्भीक और भयमुक्त होकर केस लड़ सके। उन्होंने कहा अक्सर ऐसा होता है हम किसी विपक्ष के नेता के वकील हैं और हमें शाम में धमकाया जा रहा है। या किसी माफिया, सत्ता पक्ष के नेता या सत्ता के खिलाफ अधिवक्ता हैं तो हमें डराया-धमकाया जा रहा है मारपीट हो रही है। इससे बचने के लिए हर हाल में प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी है। जिससे वकील सुरक्षा की भावना के साथ अपना केस मजबूती से लड़ सके। मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट तो हमारा क्यों नहीं ? एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल भारत सरकार अरुण मिश्रा ने बताया – एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट वक्त की जरूरत है। कई राज्यों ने इसके लिए इनिशियेटिव लिए हैं। हमारे यहां भी होना चाहिए। जैसे अलग-अलग प्रोफेशन में एक्ट है। सरकार ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया है तो जो अधिवक्ता सबसे अधिक सोसाइटी को रिप्रजेंट करता है उसके लिए यह आवश्यक है। हमारी हर चुनाव में यही मंशा और मांग है। कचहरी में असुरक्षा का भाव नहीं राहुल मिश्रा ने कहा – कचहरी परिसर में असुरक्षा का भाव नहीं है लेकिन हर व्यक्ति का अपना हित होता है। अधिवक्ताओं का भी अपना हित होता है तो जब कार्यस्थल पर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट है तो अधिवक्ताओं के ली भी यह एक्ट जरूरी है। उनका काम भी रिस्क से जुड़ा हुआ है और उन्हें भी आवश्यकता है ऐसे ही एक एक्ट की। हमने आतंकी धमाके झेले हैं, हमें इसकी जरूरत कई वर्षों तक एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन रहे बुजुर्ग वकील शिवानंद पांडेय ने बताया – जिस कदर पूरे प्रदेश में आपराधिक घटनाएं वकीलों के साथ हो रही है। ऐसे में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी है। यह मामला कहां रुका हुआ है। यह देखना होगा। यह एक्ट बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा हमने आतंकी बम धमाका इसी कचहरी परिसर में हुआ है। जिसमे पांच अधिवक्ता घायल हुए थे और तीन की मृत्यु हुई थी। कई वादकारी भी मरे और घायल हुए तो यह ज्वलंत उदाहरण है। प्रोटेक्शन एक्ट की सिर्फ यहीं नहीं पूरे प्रदेश में आवश्यकता है। अधिवक्ताओं की नहीं सुनता पुलिस और प्रशासनिक अमला द सेन्ट्रल बार एसोसिएशन वाराणसी के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी ने कहा – वकीलों के साथ लगातार घटनाएं घट रहीं हैं। आये दिन अधिवक्ता के साथ मारपीट की जा रही है। थाने पर दुर्व्यवहार हो रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अमला नहीं सुन रहा। हत्या हो रही और उनके ऊपर गोली चल रही है। ऐसे में यह एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी है। यह मामला वर्षों से लंबित है लेकिन किसी भी सरकार ने इसकी सुध नहीं ली। समय-समय पर आंदोलन भी होते हैं लेकिन अब यह आवश्यक है कि इसे लागू किया जाए। कचहरी की स्थित उपेक्षापूर्ण वाराणसी कचहरी के चुनाव पर वकील विवेक शंकर तिवारी ने कहा – स्थानीय बार के चुनाव स्थानीय मुद्दे पर होते हैं। प्रत्याशी वकीलों के मुद्दों पर चुनाव लड़ते हैं लेकिन जीतने के बाद अपने हित को साधने में लग जाते हैं। इसलिए कचहरी की स्थिति उपेक्षापूर्ण है। पेयजल,शौचालय के साथ ही साथ वकीलों के बैठने तक की जगह सही नहीं है। गर्मी, जाड़ा और बरसात हर समय टीन शेड में बैठना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि स्थायी बिदिंगे बनाई जाएं ताकि वकीलों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सरकार का रुख अधिवक्ताओं के लिए अच्छा नहीं वकील अतुल कुमार सिंह ने कहा – सरकार का रुख जो अधिवक्ताओं को लेकर है वो अच्छा नहीं है। पुलिस बहुत ही बेरुख तरीके से व्यवहार कर रही है। वकीलों के खिलाफ गलत तरीके से मुकदमे लिखकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। ये अच्छा नहीं है। वकील ऑफिसर ऑफ द कोर्ट है। वह आम जनमानस को रिप्रजेंट करता है। इसलिए उसके लिए प्रोटेक्शन एक्ट हर हाल में जरूरी है। साथ ही कचहरी में उसके बैठने की अच्छी व्यवस्था की जाए अभी भी सब टीनशेड में ही है।
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