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एटा में व्यक्ति ने फांसी लगाकर दी जान:आर्थिक तंगी और बीमारी से परेशान था, खम्भे में लटका मिला शव

एटा के नगर पंचायत मिरहची क्षेत्र के जिन्हैरा गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां राधाकृष्ण ने बीमारी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने गांव के एक विद्युत पोल पर चढ़कर फांसी लगा ली। सुबह ग्रामीणों ने जब उनका शव पोल से लटका देखा तो गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मिरहची थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को नीचे उतरवाया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राधाकृष्ण को तीन बार लकवा (पैरालाइसिस) का दौरा पड़ चुका था, जिससे वह पूरी तरह असमर्थ हो गए थे। बीमारी के चलते वह कोई काम नहीं कर पा रहे थे। उनकी पत्नी का भी करीब 18 महीने पहले निधन हो चुका था। दंपती की कोई संतान नहीं थी। बताया गया कि राधाकृष्ण ने अपनी जवानी दिल्ली में बिताई थी, लेकिन गंभीर बीमारी के कारण उन्हें गांव लौटना पड़ा। गांव में वह अपने 85 वर्षीय पिता लालाराम और 82 वर्षीय मां कैला देवी के साथ रहते थे। माता-पिता को इंदिरा आवास योजना के तहत एक मकान मिला था, जबकि राधाकृष्ण गांव में ही एक छोटे से प्लॉट पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे थे। परिजनों के अनुसार, बीमारी और आय का कोई साधन न होने के कारण वह गहरे आर्थिक संकट में थे। भोजन के लिए उन्हें रिश्तेदारों, पड़ोसियों और गांव वालों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था। बताया जा रहा है कि उन्हें किसी भी सरकारी योजना का समुचित लाभ नहीं मिल सका। बुजुर्ग मां कैला देवी ने बताया कि कभी घर में खाना बन पाता था, कभी नहीं। राशन कार्ड पर मिलने वाला 10 किलो अनाज परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं था। वहीं, पिता लालाराम की वृद्धावस्था पेंशन भी पिछले आठ महीनों से बंद थी। परिजनों का कहना है कि राधाकृष्ण खुद को अपने बुजुर्ग माता-पिता पर बोझ मानने लगे थे। घटना की जानकारी मिलते ही समाजसेवी और जनप्रतिनिधि मदद के लिए आगे आए। मौके पर पहुंचे स्थानीय चेयरमैन प्रतिनिधि सर्वेश कुमार ने बताया कि परिवार अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहा था। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पहले भी परिवार को मदद दी जाती रही है। घटना के बाद आटा, कंबल और अन्य आवश्यक सामान भिजवाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में राधाकृष्ण की मां उनके घर सहायता के लिए आई थीं, तब उन्हें पांच हजार रुपए की आर्थिक मदद दी गई थी। इस घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।


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