वर्ष 2025 में वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ SOS ने मथुरा,आगरा में 1300 से ज्यादा जीव,जंतुओं का रेस्क्यू किया। संस्था से जुड़े कर्मियों ने एक वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा अलग अलग जगह से सरीसृप का रेस्क्यू किया। रेस्क्यू किए गए जीव जंतुओं को उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। आश्रय छीनने से शहरों की तरफ आ जाते हैं जीव जंतु वाइल्डलाइफ एसओएस ने वर्ष 2025 में आगरा,मथुरा और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगभग 1,300 जंगली जानवरों को बचाया है।तेजी से होते शहरीकरण, प्राकृ़तिक आवास का घटना और चरम जलवायु प्रदुषण अनगिनत प्रजातियों को खतरे में डाल रही हैं। प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने और इंसानों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण बढ़ने के कारण, जंगली जानवर भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में शहरी क्षेत्रों में जाने के लिए विवश हो रहे हैं। भीषण गर्मी, ठंडी हवाएँ और मानसून वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों को और बढ़ा रही हैं। परिणामस्वरूप, वाइल्डलाइफ एसओएस की हेल्पलाइन पर स्तनधारियों, सरीसृपों और पक्षियों से संबंधित सैकड़ों कॉल प्राप्त हुए, जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी। 600 सरीसृपों का किया रेस्क्यू उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से, वाइल्डलाइफ एसओएस ने पूरे वर्ष बचाव अभियान चलाए, जिससे समय पर जहां भी संभव हो, सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। बचाए गए जानवरों में 600 से अधिक सरीसृपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया। इनमें मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड और सांपों की कई प्रजातियां जैसे कि वुल्फ स्नेक, अजगर और कोबरा शामिल थे। जिनमें से कई आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, व्यवसायिक स्थलों और खेतों के अंदर पाए गए थे। 433 स्तनधारियों को भी बचाया संस्था ने नीलगाय, हॉग डियर, लकड़बग्घा, तेंदुए का शावक, सांभर हिरण और कई बंदर सहित 433 स्तनधारी जीवों को भी बचाया। इसके अलावा 295 पक्षियों को भी बचाया गया। जिनमें भारतीय मोर, बगुला और चील शामिल थीं। यह संस्था की पर्यावास में व्यवधान, चोटों, निर्जलीकरण या जाल में फंसने से प्रभावित पक्षी प्रजातियों की सहायता करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक रहा वर्ष 2025 वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण, ने कहा 2025 चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक दोनों रहा है। अप्रत्याशित मौसम और मानवीय दबावों के कारण वन्यजीवों पर बढ़ते खतरों के बावजूद टीम ने त्वरित और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देना जारी रखा। यह उपलब्धि कर्मचारियों, स्वयंसेवकों के समर्पण और वन विभाग की सहायता के बिना संभव नहीं होती। वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि, ने कहा हर बचाव अभियान भारत की जैव विविधता के संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाता है। शहरीकरण के विस्तार के साथ, अधिक से अधिक जानवर मानव-प्रधान क्षेत्रों में देखे जाते हैं, और उन्हें सुरक्षित मार्ग और पुनर्वास प्रदान करने की हमारी जिम्मेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा मगरमच्छों से लेकर पक्षियों और बड़े स्तनधारियों तक हर बचाव अभियान हमारी टीम की दक्षता को दर्शाता है, जो अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करती है।
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