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एक कॉल से गिरफ्त में आई घूसखोर महिला IRS अफसर:झांसी में सुपरिटेंडेंट ने कहा- पार्टी ने 70 लाख दे दिए, जबाव दिया- गोल्ड में कनवर्ट करो

झांसी में सेंट्रल जीएसटी की घूसखोर डिप्टी कमिश्वर (IRS अफसर) प्रभा भंडारी की गिरफ्तारी एक कॉल से हुई। CBI ने 70 लाख की घूस लेते जीएसटी के 2 सुपरिटेंडेंट को रंगेहाथ पकड़ा तो दोनों बोले- रिश्वतकांड की मास्टरमाइंड मेडम प्रभा भंडारी हैं। उनके कहने पर ही डेढ़ करोड़ में डील हुई थी। पहली किस्त के तौर पर 70 लाख रुपए ले रहे थे। ऐसे में CBI अफसरों ने अपने सामने सुपरिटेंडेंट से उनको फोन करवाया। दो रिंग जाते ही मेडम ने कॉल उठा लिया। सुपरिटेंडेंट ने कहा- मेडम पार्टी से 70 लाख रुपए आ गया। जबाव में मेडम प्रभा बाेली- बहुत बढ़िया। इस रकम को गोल्ड में कनवर्ट कराकर मुझे दे दो। इस दौरान प्रभा भंडारी दिल्ली में थी। तब एक टीम ने उनको दिल्ली में ही अरेस्ट कर लिया। बताया जा रहा है कि प्रभा भंडारी के पति आर्मी में कर्नल है। बुधवार रात को उनके फ्लेट का ताला तोड़कर सीबीआई ने लगभग 4 घंटे तक तलाशी ली। जहां से गोल्ड, कैश और प्रॉपर्टी के कागजात बरामद किए गए। बताया जा रहा कि 12 दिन पहले सेंट्रल GST ने जय दुर्गा हार्डवेयर फर्म पर छापा मारा था। इस केस को रफा-दफा करने के लिए अफसरों ने डेढ़ करोड़ की घूस मांगी थी। इसकी खबर सीबीआई को लग गई। सीबीआई ने 70 लाख रुपए की घूस लेते 2 सुपरिंटेंडेंट को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। साथ में जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मंगनानी और जीएसटी मामलों के अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता को भी अरेस्ट किया गया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को पकड़ा गया। तलाशी में आरोपियों के पास से 90 लाख रुपए, भारी मात्रा में सोने की ज्वेलरी और कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस तरह कुल 1.60 करोड़ रुपए कैश जब्त किया गया। अब पढ़िए, सीबीआई के ट्रेप की पूरी कहानी 12 दिन पहले मारा था छापा 19 दिसंबर को डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के नेतृत्व में सेंट्रल जीएसटी की टीम ने झोकन बाग में जय दुर्गा हार्डवेयर फर्म पर छापा मारा था। फर्म पर टैक्स में गड़बड़ी करने का आरोप था। इसके चलते करीब 13 करोड़ रुपए की कर वसूली का मामला बन रहा था। टीम यहां से 3 बोरों में कागजात भरकर ले गई थी। इस मामले की छानबीन चल रही थी। बताया जा रहा है कि इस मामले को निपटाने के लिए सेंट्रल जीएसटी अफसर डेढ़ करोड़ रुपए की डिमांड कर रहे थे। इसको लेकर वकील नरेश कुमार गुप्ता के जरिए जय दुर्गा हार्डवेयर का प्रोपराइटर राजू मंगनानी से बातचीत चल रही थी। इसका इनपुट सीबीआई तक पहुंच गया था। सीबीआई ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया। मंगलवार को झांसी पहुंच गई थी CBI टीम CBI टीम ने कार्रवाई के लिए मंगलवार को ही झांसी में डेरा डाल दिया था। टीम को मालूम चला था कि जीएसटी छापे (ट्रैप) की कार्रवाई रोकने की एवज में सेंट्रल जीएसटी अफसर लंबे रिश्वत लेने की फिराक में हैं। इसके बाद से ये अफसर सीबीआई के रडार पर थे। सीबीआई को इनपुट मिला कि मंगलवार को घूस के 70 लाख रुपए अफसरों तक पहुंचने वाला है। तब सीबीआई ने जाल बिछाया। सीबीआई ने 70 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दो सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। साथ में फर्म के मालिक राजू मंगतानी और वकील नरेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। तलाशी में 90 लाख रुपए और मिले सीबाईआई ने दोनों सुपरिटेंडेंट से पूछताछ की तो बोले- मेडल प्रभा भंडारी के कहने पर रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था। मेडम ही मास्टरमाइंड है। उनके कहने पर ही रिश्वत की रकम ली थी। मेडम को ये भी पता है कि आज पहली किस्त के तौर पर 70 लाख मिलने वाले हैं। तब सीबीआई अफसरों ने अपने सामने सुपरिडेंटेंड अनिल तिवारी से डिप्टी कमिश्नर को फाेन कराया। फोन कॉल को रिकॉर्ड भी किया। अनिल ने डिप्टी कमिनर से कहा कि पार्टी से पैसा आ गया। तब डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी बोली- गोल्ड में कनवर्ट कराकर दे दो। तब सीबीआई ने दिल्ली से प्रभा भंडारी को अरेस्ट कर लिया। इसके बाद उनके घर और अन्य ठिकानों पर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान इनके पास से 90 लाख रुपए, कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज समेत सोने-चांदी के जेवरात बरामद हुए। अब तक कुल कैश एक करोड 60 लाख रुपए की बरामदगी हो चुकी है। फ्लाइट से लाया गया लखनऊ सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को गाजियाबाद कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया। इसके बाद सीबीआई अफसर उनको लेकर फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। बाकी के चार आरोपियों को झांसी कोर्ट में पेश किया गया। उनको भी लखनऊ ले जाया गया। अब गुरुवार को चारों को लखनऊ सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। 15 साल से झांसी में तैनात था अनिल तिवारी सीबीआई टीम सबसे पहले सेवाराम मिल कंपाउंड निवासी अनिल तिवारी के यहां पहुंची। अनिल के यहां महंगे फर्नीचर समेत पूरे घर में लग्जरी वस्तुएं थीं। एक से एक महंगे आइटमों का घर की सजावट में इस्तेमाल हुआ था। सीबीआई को यहां से कई गोपनीय फाइल भी मिली। टीम इसे अपने साथ ले गई। यहां से नकदी भी बरामद हुई। सीबीआई को बताया गया कि अनिल झांसी में करीब ढाई दशक से तैनात हैं। जीएसटी से जुड़े सारे विवादित मामले अनिल के सहारे सुलझाए जाते हैं। दो साल पहले उनका आगरा तबादला हो गया था लेकिन, कुछ महीनों बाद वह दोबारा झांसी आ गया। तैनाती के दौरान अनिल ने अकूत संपत्ति जमा कर ली। अनिल सिविल लाइंस स्थित एक प्रतिष्ठित रेस्तरा में पार्टनर समेत जमीन के कारोबार में भी शामिल हैं। जमीन के धंधे में करोड़ों रुपए लगा रखे हैं। वहीं, स्टेशन रोड निवासी अजय शर्मा ने भी अपनी चार साल की तैनाती में अकूत संपत्ति जमा कर ली थी। उसके घर में भी लग्जरी आइटमों की भरमार मिली। उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। 6 माह पहले झांसी तैनाती हुई थी प्रभारी डिप्टी कमिश्नर आईआरएस प्रभा भंडारी की 6 माह पहले तैनाती हुई थी। हालांकि उन्होंने भी अनिल एवं अजय के हवाले ही पूरा कार्यालय कर दिया था। बताया जाता है कि प्रभा ने कुछ माह पहले ही 68 लाख रुपए का फ्लैट खरीदा था। जीएसटी अफसरों के पास से घूस के तौर पर 70 लाख समेत 1.60 करोड़ रुपए बरामद हुए। उनके घर से सोने-चांदी की ईंट एवं शेयर मार्केट में पैसा लगाए जाने की बात भी उजागर हुई। हालांकि सीबीआई ने अलग-अलग बरामदगी का खुलासा नहीं किया। हार्डवेयर का बड़ा कारोबारी है राजू मंगनानी 70 लाख रुपए की रिश्वत देते सीबीआई के हत्थे चढ़ा राजू मंगनानी की गिनती शहर के बड़े कारोबारियों में होती है। उसने अपने भाई तेजपाल के साथ मिलकर जय दुर्गा हार्डवेयर नाम से फर्म बनाई है। यह फर्म दरवाजे, प्लाईवुड समेत तमाम सारे आइटम की सप्लाई का काम करती है। आसपास के कई जनपदों में भी इनका कामकाज फैला है। इसके अलावा दोनों भाइयों ने कुछ समय पहले जमीन का काम भी शुरू कर दिया था।


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