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ऊंचाहार में दशकों से बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय:रायबरेली में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों पर लटके ताले

ऊंचाहार (रायबरेली): नगर पंचायत ऊंचाहार में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय दशकों से बंद पड़े हैं। महादेवन, मजहरगंज, फाटक भीतर और अलीगंज जैसे प्रमुख मोहल्लों में स्थित इन शौचालयों पर महीनों से ताले लटके हुए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि इन शौचालयों के रखरखाव और सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। शौचालयों के बाहर सफाई कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर की पट्टिकाएं लगी हैं, लेकिन ये कर्मचारी कथित तौर पर केवल कागजों पर तैनात हैं। वे अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहते हैं, फिर भी उनका मासिक वेतन नियमित रूप से निकाला जा रहा है। धरातल पर इन शौचालयों की सफाई का कोई नामोनिशान नहीं है। सरकारी खजाने से पैसा तो निकल रहा है, लेकिन इसका लाभ जनता तक नहीं पहुँच पा रहा है। इससे स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को खुलेआम चुनौती मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कभी अधिकारी जांच के लिए आते हैं, तो उन्हीं ‘कागजी’ कर्मचारियों को शौचालय के बाहर तैनात कर दिया जाता है। चूंकि जांच या निरीक्षण अक्सर पूर्व निर्धारित होते हैं, इसलिए कथित तौर पर अनियमितताओं को छिपाने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली जाती है। इस पूरे प्रकरण से सरकारी धन के दुरुपयोग और जनता को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने का मामला सामने आया है। यह स्थिति नगर पंचायत ऊंचाहार में स्वच्छता अभियान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऊंचाहार नगर में गंदगी का साम्राज्य स्थापित है। आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जिन इक्का-दुक्का शौचालयों के ताले खुले भी हैं, उनकी स्थिति नारकीय है। साफ-सफाई के अभाव में ये शौचालय बीमारियों का केंद्र बन रहे हैं। गंदगी और सड़न के कारण लोग इनके पास से गुजरने में भी कतराते हैं। महादेवन और अलीगंज जैसे व्यस्त इलाकों में शौचालयों का बंद होना नगर पंचायत की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हैरानी की बात यह है कि मोहल्ले दर मोहल्ले जनता परेशान है और सरकारी धन की खुलेआम बर्बादी हो रही है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा बिना काम किए वेतन लेना एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। इतने गंभीर मुद्दे पर प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि स्वच्छता केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन शौचालयों को तुरंत चालू नहीं किया गया और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला प्रशासन के द्वार पर दस्तक देंगे। स्थानीय लोगों को आला अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद है।


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