ऊंचाहार नगर पंचायत में विकास कार्यों में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। “नगरीय झील/पोखर/तालाब संरक्षण योजना” के तहत वार्ड नंबर 4, खत्री टोला स्थित दीवान तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री के उपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। तालाब के किनारे इंटरलॉकिंग सड़क और सौंदर्यीकरण का कार्य कथित तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। निर्माण स्थल पर प्रथम श्रेणी की ईंटों के बजाय पीले और दोयम दर्जे की ईंटों का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग बिछाने से पहले गिट्टी नहीं डाली गई और न ही उचित कुटाई की गई। पहले 2 तस्वीरें देखिए… सीमेंट और मौरंग का मिश्रण भी इतना कमजोर है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही उखड़ने लगा है। इस पूरे मामले पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अरशद सुल्तान ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने बताया कि यह कार्य उनके कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा सचिवालय से 30 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। सुल्तान ने कहा कि उनकी मंशा जनता के पैसे का सदुपयोग करने की थी। अरशद सुल्तान ने वर्तमान में अपनाई जा रही घटिया गुणवत्ता को दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी संबंधित अधिकारियों को आगाह किया है। सुल्तान ने भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों और नगर पंचायत के जिम्मेदारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सभासद के पास वित्तीय अधिकार नहीं होते, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और भ्रष्टाचार नहीं रुका, तो वे नगर पंचायत गेट के सामने अन्न त्याग कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि प्रथम नागरिक होने के नाते उन्हें अपने पद की गरिमा और सरकारी धन की पारदर्शिता का ध्यान रखना चाहिए। स्थानीय निवासियों और बुद्धिजीवियों ने जिलाधिकारी रायबरेली से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि 30 लाख की भारी-भरकम लागत के बावजूद पीली ईंटों से विकास की बुनियाद रखी जाएगी, तो यह सौंदर्यीकरण चंद महीनों में ही जमींदोज हो जाएगा और सरकारी का धन का दुरुपयोग होगा।
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