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इस्तीफे के बाद बरेली में गरजे पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार:सरकार के आरोप पत्र को बताया हास्यास्पद, बोले- हक की बात कहना गुनाह है तो यह जुर्म बार-बार होगा

“देश की सरकार खुद भेदभाव के कानून बनाकर समाज को बांट रही है और जब मैं अपने वर्ग के हक के लिए आवाज उठाता हूं, तो मुझे चार्जशीट थमा दी जाती है। यह आरोप पत्र नहीं, बल्कि सच को दबाने की कोशिश है।” यह तीखे बोल हैं पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के, जिन्होंने 26 जनवरी को इस्तीफा देकर सिस्टम में खलबली मचा दी थी। मंगलवार को जब वे दोबारा बरेली के परशुराम धाम पहुंचे, तो प्रशासन द्वारा थमाए गए ‘आरोप पत्र’ पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि वे इन गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं और अब सीधे दिल्ली कूच की तैयारी है। बरेली में हुआ जोरदार स्वागत
बरेली के लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पहुंचते ही समर्थकों ने उन्हें फूलों से लाद दिया और ‘शेर आया’ के नारों से आसमान गुंजा दिया। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर आए अलंकार ने अब सीधे केंद्र सरकार के खिलाफ ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान कर दिया है। 7 फरवरी तक का दिया अल्टीमेटम
अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका अगला लक्ष्य देश के ‘काले कानून’ यानी एससी-एसटी एक्ट को खत्म कराना है। उन्होंने केंद्र सरकार को 7 फरवरी तक का समय देते हुए कहा कि अगर विशेष संसद सत्र बुलाकर इस ‘ड्रैकनियन एक्ट’ (क्रूर कानून) को खत्म नहीं किया गया, तो देशव्यापी आंदोलन होगा। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह कानून सामान्य और ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय है। सरकार ने थमाया आरोप पत्र, बोले- अपनी बात कहना अपराध नहीं
इस्तीफे के बाद प्रशासन की ओर से मिले नोटिस और आरोप पत्र पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने समाज और सामान्य वर्ग के हक की बात करना अपराध कैसे हो गया? अलंकार ने कहा, “सरकार खुद यूजीसी रेगुलेशन 2026 और एससी-एसटी एक्ट के जरिए समाज में विभेद पैदा कर रही है, और जब हम इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं तो हमें आरोप पत्र दिए जाते हैं।” उन्होंने इन आरोपों को हास्यास्पद बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही। शंकराचार्य के अपमान पर कमिश्नर और प्रशासन मांगे माफी
प्रयागराज की घटना का जिक्र करते हुए पूर्व पीसीएस अधिकारी ने कहा कि कल ही उनकी मुलाकात बनारस में शंकराचार्य जी से हुई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बटुकों की शिखा पकड़कर उन्हें पीटा गया, वह अक्षम्य है। उन्हें सूचना मिली है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में टीम गठित की है। अलंकार ने मांग की कि इस अपमान के लिए जिला प्रशासन और कमिश्नर को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सनातन परंपरा के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। नेताओं को बताया ‘रीढ़विहीन’, बोले- अब विकल्प की तलाश
राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आज के जनप्रतिनिधि ‘आका’ के फोन का इंतजार करते हैं, उनमें सच बोलने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश अब ‘सनातनी बनाम गैर-सनातनी’ विचारधारा पर बंट चुका है। जब उनसे तीसरे विकल्प के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ध्यान आंदोलन पर है, लेकिन आने वाली नस्लों के भविष्य को बचाने के लिए जल्द ही नए विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने दिल्ली कूच करने को भी कहा।


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