इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईआईटी) के वैज्ञानिकों ने अस्पतालों में फैलने वाले जिद्दी बैक्टीरियाई संक्रमणों के खिलाफ एक क्रांतिकारी नई दवा विकसित की है। यह दवा बायोफिल्म पर सीधा हमला करती है। जो बैक्टीरिया की मजबूत परत होती है और आम दवाओं को बेअसर कर देती है। इविवि की रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. दीप्ति वर्मा और बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अवध बिहारी के नेतृत्व में विकसित इस तकनीक में किसी महंगे या जहरीले धातु का इस्तेमाल नहीं किया गया। बल्कि एक प्राकृतिक एसिड का उपयोग कर आसान, कम खर्चीली और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से एंटी-बायोफिल्म दवाएं तैयार की गई हैं। प्रयोगशाला परीक्षणों में यह दवा 88 प्रतिशत तक खतरनाक बैक्टीरिया को नष्ट करने में सफल साबित हुई है। डॉ. बिहारी ने बताया कि अस्पतालों में बायोफिल्म बनने से संक्रमण लंबे समय तक टिके रहते हैं और इलाज मुश्किल हो जाता है। हमारी दवा इस समस्या का सीधा समाधान है। जल्द ही इसका परीक्षण चूहों पर शुरू होगा। कम लागत के कारण यह गरीब और मध्यवर्गीय मरीजों के लिए सुलभ होगी तथा दवा उद्योग में सतत विकास को बढ़ावा देगी।यह शोध प्रतिष्ठित एसीएस ओमेगा जर्नल के हालिया अंक में प्रकाशित हो चुका है। इस खोज से स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है।
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