बरेली नगर निगम में शनिवार को करीब 1000 करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया गया। बैठक में मेयर ने साफ कहा कि अब अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। पैसा है, योजनाएं हैं, लेकिन काम जमीन पर नहीं दिख रहे। ऐसे में मेयर ने खुलकर फटकार लगाते हुए कहा कि हर वार्ड में 15 दिसंबर तक एक-एक करोड़ के काम के टेंडर निकाले जाये। लाइट, सड़क, नाली, टेंडर और फाइलों की धीमी रफ्तार पर भी मेयर ने तल्ख सवाल उठाए। जनता पूछ रही है कि पैसा होते हुए भी काम क्यों नहीं हो रहा, और शायद आज मेयर भी यही सवाल अपने ही अफसरों से पूछते दिखाई दिए। अब पढ़े मेयर का पूरा इंटरव्यू प्रश्न: आज बरेली नगर निगम (बीएमसी) के बजट में सबसे बड़ी घोषणा क्या रही और कुल बजट कितना पेश किया गया?
मेयर: आज बरेली नगर निगम ने 1,98,54,15,279 रुपये का पुनरीक्षित बजट पेश किया है, जो कुल मिलाकर करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक बनता है। इसमें शहर के 80 वार्डों के लिए विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। हमारी योजना साफ है कि हर वार्ड में 15 दिसंबर तक एक-एक करोड़ के काम टेंडर के साथ शुरू हो जाएं। प्रश्न: आपके पास बजट पर्याप्त है, फिर भी वार्डों में काम क्यों नहीं हो रहे?
मेयर: यही सबसे बड़ा सवाल है और जनता भी यही पूछती है कि पैसा है तो काम क्यों नहीं हो रहे। हमारी समस्या केवल काम की रफ्तार है। बजट पूरा है, संसाधन पूरे हैं, लेकिन फाइलें आगे बढ़ने में कई-कई दिन लगाती हैं। इसी वजह से मैंने मीटिंग में साफ कहा कि बाबू 24 घंटे से ज्यादा फाइल अपने पास न रखें। अगर बाबू नहीं मानते हैं तो नोटिस जारी किया जाए। नगर आयुक्त का और मेरा ऑफिस आमने-सामने है, लेकिन एक फाइल को वहां से यहां आने में 9 दिन लग जाते हैं, यह स्थिति अब नहीं चलेगी। प्रश्न: हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइट को लेकर समिति के सदस्यों ने सवाल उठाए। इस पर आपका क्या कहना है?
मेयर: हर वार्ड में हाईमास्ट और नई स्ट्रीट लाइटें लगनी चाहिए। लाइटें हमारे पास पर्याप्त हैं, फिर भी कई वार्डों में एक भी लाइट नहीं लगी। जब मैंने अधिकारी से पूछा कि लाइट क्यों नहीं लगी तो वह बहानेबाजी करने लगा। मैंने साफ कहा कि अब बहाने नहीं चलेंगे। हर वार्ड में 100-100 लाइटें लगाई जाएं। दिवाली से पहले 25-25 लाइट लगाने को कहा था, लेकिन कहीं एक लगी तो कहीं एक भी नहीं। इस तरह काम नहीं चलेगा। चीफ इंजीनियर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जरूरी टेंडर तुरंत जारी हों। प्रश्न: 80 करोड़ रुपये मार्च तक खर्च होने हैं, जबकि अभी तक 10 करोड़ ही खर्च हुए हैं। क्या यह लक्ष्य पूरा हो पाएगा?
मेयर: अगर टेंडर समय पर निकलें और अधिकारी फाइलों को समय पर आगे बढ़ाएं तो लक्ष्य बिल्कुल पूरा होगा। इसलिए 15 दिसंबर तक की कड़ी डेडलाइन दी गई है। अगर देरी हुई तो पैसा लेप्स होगा और यह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है। सभी विभागों को कहा गया है कि समय सीमा में काम पूरा करें। जनता को यह महसूस होना चाहिए कि हम 24 घंटे उनकी सेवा में लगे हुए हैं। प्रश्न: बरेली के वार्डों की खराब लाइटिंग, सड़कों और नालियों की शिकायतें लगातार आती हैं। इस पर अब क्या योजना है?
मेयर: हमारी कोशिश है कि दिसंबर 2026 तक बरेली को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया जाए। कोई सड़क टूटी न रहे, कोई नाली अधूरी न रहे, हर गली रोशन रहे। जहां चार खंभे हैं और दो पर लाइट है, वहां दो और लगाई जाएंगी। हमारा लक्ष्य है कि पूरा शहर चमके। बरेली को देश के टॉप 10 शहरों की फेहरिस्त में लाना है और इसके लिए ठोस काम करना होगा। प्रश्न: फाइलों की धीमी गति, विभागीय लापरवाही और मनमानी को रोकने के लिए आपने क्या निर्देश दिए हैं?
मेयर: मीटिंग में मैंने साफ कहा कि अब किसी भी हाल में अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। बाबू से लेकर इंजीनियर तक हर कर्मचारी को टाइमलाइन फॉलो करनी होगी। फाइल 24 घंटे से ज्यादा नहीं रुकेगी। जो कर्मचारी गैर-गंभीर हैं, उन्हें नोटिस देकर जवाब तलब किया जाएगा। विकास तभी होगा जब सिस्टम तेज चलेगा, नहीं तो जनता का विश्वास टूटता है। प्रश्न: क्या बरेली को इंदौर और चंडीगढ़ जैसे शहरों की तरह विकसित करने की योजना भी इस बजट में शामिल है?
मेयर: बिल्कुल। हमारा लक्ष्य दिसंबर 2026 तक का है। हम चाहते हैं कि बरेली किसी भी वार्ड में टूटी हुई सड़क, नाली या अधूरी सीवर लाइन न छोड़े। हर गली में लाइटें पूरी हों। बरेली पूरी तरह रोशन और व्यवस्थित दिखे, यह हमारा संकल्प है। प्रश्न: बरेली में बंदरों, कुत्तों और छुट्टा पशुओं की समस्या लगातार बनी रहती है। इस पर क्या योजना है?
मेयर: स्ट्रीट डॉग्स के लिए सुप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देश हमें प्राप्त हो चुके हैं। अब हम फीडिंग पॉइंट चिह्नित कर रहे हैं, जहां स्ट्रीट डॉग्स को एक नियत स्थान पर भोजन दिया जाएगा। अभी तक लगभग 45 स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। इससे उनका लोकेशन फिक्स रहेगा और वैक्सीनेशन आसानी से हो सकेगा, क्योंकि अभी वे यहां-वहां घूमते रहते हैं और पकड़ में नहीं आते। इसके अलावा एक शेल्टर होम भी बनाया जा रहा है, जहां बीमार या रेबीज वाले कुत्तों को अलग रखकर इलाज किया जाएगा। इससे जनता सुरक्षित रहेगी और कुत्तों की उचित देखभाल भी हो सकेगी। प्रश्न: शहर में कूड़ा खुले में फेंकने की समस्या बनी रहती है। जनता को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मेयर: लगभग 80 प्रतिशत घरों से डोर टू डोर कूड़ा उठ रहा है। जनता से मेरा निवेदन है कि कूड़ा सड़क पर या नाली में न फेंकें। कचरा सिर्फ नगर निगम के कर्मचारियों को दें। मलिन बस्तियों में यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है। बाकी जगहों पर भी मात्र 50 रुपये महीने में यह सेवा मिल रही है। शहर को साफ रखना सबकी जिम्मेदारी है। हम सब मिलकर ही बरेली को स्वच्छ बना सकते हैं। प्रश्न: मुख्यमंत्री ने सरकारी जमीनों से कब्जे हटाकर EWS मकान बनाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की जमीनों पर क्या कार्रवाई चल रही है?
मेयर: नगर निगम लगातार कब्जे हटवा रहा है और कई स्थानों को चिन्हित भी किया है। एक स्थान अभी हाल ही में मिला है, जिसे हमने शासन को प्रस्तावित किया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है, वहां गरीबों के लिए EWS मकान बनेंगे। जो जमीनें कब्जे में थीं, वहां अब गरीबों के आशियाने नजर आएंगे। प्रश्न: अंत में जनता के लिए आपका क्या संदेश है?
मेयर: जनता की जिम्मेदारी है कि हमें गलतियां बताएं, शिकायतें करें, और हमसे जवाब मांगें। जनता पूछ रही है कि पैसा होते हुए भी काम क्यों नहीं हो रहा। अब मैं भरोसा दिलाता हूं कि अगले 15 दिन शहर में तेजी से बदलाव दिखेगा। हमारी टीम पूरी ताकत से काम करेगी और हर वार्ड में विकास की गंगा बहेगी। मेयर का कहना है कि बरेली को स्मार्ट, रोशन और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए बजट पूरा है और लक्ष्य तय कर दिया गया है। आने वाले समय में बरेली की तस्वीर बदलने वाली है।
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