अयोध्या में बदलते मौसम के कारण चना और सरसों की फसलों पर कीटों का खतरा बढ़ गया है। दिन में हल्की धूप और सुबह-शाम की ठंड से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कीट वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ. रवि मौर्य ने फसलों को बचाने के लिए नीम तेल के छिड़काव की सलाह दी है। कई खेतों में सरसों में माहू और चना में हरी इल्ली व सुंडी का प्रकोप देखा जा रहा है। रात की ठंडी हवाएं और सुबह की ओस फसलों के लिए अनुकूल मानी जाती हैं, लेकिन दिन में तापमान बढ़ने के साथ ही कीट सक्रिय हो जाते हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण न किया जाए, तो दलहनी और तिलहनी फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। इस संबंध में कीट वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ. रवि मौर्य ने बताया कि चना और सरसों की फसल में फूल और कलियां आने के चरण में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने इस दौरान नीम तेल के छिड़काव को सबसे प्रभावी उपाय बताया। डॉ. मौर्य के अनुसार, नीम तेल एक प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में कार्य करता है, जो कीटों की वृद्धि को रोकता है। इसके प्रयोग से फसल सुरक्षित रहती है और रासायनिक दवाओं पर किसानों की निर्भरता भी कम होती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यदि खेत में पहले से ही कीट दिखाई देने लगें, तो किसान अनुशंसित दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं। हालांकि, बिना विशेषज्ञ की सलाह के अधिक मात्रा में दवाओं का प्रयोग हानिकारक हो सकता है। डॉ. मौर्य ने बताया कि नीम ऑयल कृषि रक्षा इकाइयों पर आसानी से उपलब्ध है, जहां से किसान इसे खरीदकर अपनी फसलों का बचाव कर सकते हैं।
https://ift.tt/HeuSyfo
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply