लखनऊ की समाजसेवी वर्षा वर्मा ने शनिवार को अयोध्या के गुप्तारघाट पर सरयू नदी में लावारिश शवों की अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन किया। इनमें एक शव सीतापुर के एक ब्रिगेडियर का भी था, जिनका अंतिम संस्कार लखनऊ के चौक स्थित गुलाला घाट पर हुआ था। बताया गया कि परिवार के लोग जल्दबाजी में अस्थियां विसर्जित किए बिना ही लौट गए थे। वर्षा वर्मा ने बताया कि गुलाला घाट पर उनका रोज आना-जाना होता है। वहीं के कर्मचारियों से उन्हें इस बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्वयं अस्थियों को एकत्रित किया और विसर्जन के लिए अयोध्या पहुंचीं। 8 हजार लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करवा चुकी
उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में अब तक करीब 8 हजार लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करवा चुकी हैं। वे शवों का पूजन कर मोक्ष की कामना करती हैं। अस्थियों को 15 दिनों तक एकत्रित कर एक साथ अंतिम संस्कार और विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। यह पूरा कार्य वह अपने हाथों से करती हैं। 45 वर्षीय वर्षा वर्मा दो बेटियों की मां हैं। उनके पति पेशे से इंजीनियर हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वह उन लोगों के लिए यह सेवा कर रही हैं, जिनका अंतिम संस्कार विधिवत नहीं हो पाता। वे लावारिश शवों की अस्थियों को एकत्र कर अयोध्या सहित प्रदेश की प्रमुख नदियों में विसर्जित करती हैं। वर्षा वर्मा का कहना है कि इस सेवा कार्य को करते हुए उन्हें आत्मिक संतोष और शांति का अनुभव होता है। शुरुआती दिनों में लोगों को उनका यह काम अजीब लगता था, लेकिन अब समाज उनके प्रयासों की सराहना कर रहा है और उन्हें नैतिक समर्थन भी मिलने लगा है।
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