अम्बेडकरनगर में धान खरीद की रफ्तार धीमी बनी हुई है। इसका मुख्य कारण चावल मिलों को फोर्टिफाइड राइस कर्नल्स (एफआरके) का उपलब्ध न होना है। एफआरके की कमी के चलते मिलें अग्रिम चावल सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंचा पा रही हैं, जिससे खरीद लक्ष्य का मात्र सात प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। जिले में धान खरीद के लिए कुल 102 केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि दो अन्य केंद्र जल्द ही स्थापित होंगे। 27 नवंबर तक 2642 किसानों से 10861.09 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। इन केंद्रों में खाद्य विभाग के 34, पीसीएफ के 36, पीसीयू के 20, यूपीएसएस के आठ, मंडी समिति के दो और भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एफपीओ के दो केंद्र भी जल्द ही क्रियाशील होंगे। समय पर धान का उठान न होने पर केंद्रों पर धान सूखने की स्थिति में केंद्र प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। बाजार में धान का भाव 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस बड़े अंतर के कारण बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। राइस मिलर्स और आढ़तियों पर किसानों से कम दाम पर धान खरीदने के आरोप भी लग रहे हैं। वर्तमान में एफआरके की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, क्योंकि पूरे अयोध्या संभाग में केवल तीन मिलों को ही इसकी अनुमति मिली है। एफआरके प्राप्त करने के लिए लगभग 64 राइस मिलरों ने चार करोड़ रुपये जमा किए हैं। उम्मीद है कि एफआरके 5 दिसंबर के बाद उपलब्ध हो सकेगा। काफी प्रयासों के बाद गुरुवार को चावल मिलों को खरीद केंद्रों से संबद्ध किया गया, जिसमें प्रत्येक केंद्र को दूरी के आधार पर स्वतः ऑनलाइन चार मिलों से जोड़ा गया है। डीआरएमओ गोरख नाथ त्रिपाठी ने बताया कि धान खरीद प्रक्रिया जारी है और 64 राइस मिलों को संबद्ध कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि धान खरीद पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
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