अमेठी में मंगलवार को प्रमोद आलोक इंटर कॉलेज में पकड़ी गई नकली कीटनाशक और उर्वरक फैक्ट्री के मामले में जांच तेज हो गई है। प्रारंभिक पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क केवल अमेठी तक सीमित नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और अन्य प्रदेशों तक फैला हुआ है। कृषि विभाग की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह नामी ब्रांडों के नाम का इस्तेमाल कर किसानों को गुमराह कर रहा था। नकली कीटनाशक और उर्वरक की आपूर्ति स्थानीय दुकानों और एजेंटों के माध्यम से बड़े पैमाने पर की जा रही थी। उत्पादों को असली दिखाने के लिए पैकेटों और बोरियों पर नामी कंपनियों के लेबल, आकर्षक डिजाइन और फर्जी विवरण अंकित किए जाते थे। किसानों को कम कीमत का लालच देकर नकली माल बेचा गया, जिससे उनकी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में कई संदिग्ध फर्मों और व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इन लोगों ने विभिन्न जिलों में गोदाम और अस्थायी इकाइयां बना रखी थीं। इस मामले में नकली उर्वरक और कीटनाशक दवा फैक्ट्री के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश यादव ने फैक्ट्री संचालक शिवम तिवारी और श्रमिक राम उजागिर यादव को आरोपी बनाया है। पुलिस अब मुख्य आरोपी शिवम तिवारी की तलाश कर रही है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत दुकानों से ही कीटनाशक और उर्वरक खरीदें और खरीद के समय पक्का बिल अवश्य लें। किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तत्काल कृषि विभाग या प्रशासन को देने का आग्रह किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों से बचाव के लिए किसानों की जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है।
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