अमेठी तहसील के कोहरा गांव के किसान अजय सिंह ने 30 साल तक सीड इंडस्ट्री में नौकरी करने के बाद खेती को अपना करियर बनाया है। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रगतिशील सोच से खेती की परिभाषा बदल दी है, जिससे वे लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उत्तराखंड के पंतनगर से परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाले अजय सिंह ने पूरे देश में घूमकर प्रगतिशील किसानों से काम करवाया था। जब उन्हें गेहूं और धान जैसी पारंपरिक खेती में अपेक्षित लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपनी पुश्तैनी जमीन को ही अपना कार्यक्षेत्र बनाने का फैसला किया। अजय सिंह बताते हैं कि 30 साल तक जो काम वे किसानों से करवाते थे, उन्हें लगा कि अब उन्हें खुद ही यह काम शुरू करना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव की ओर रुख किया और अपनी जमीन पर खेती शुरू की। पहले वे भी पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन उसमें लागत के मुकाबले मुनाफा न के बराबर था। इसके बाद उन्होंने अपना रास्ता बदला और सब्जी की खेती की शुरुआत की। आज वे अपने गांव की चार हेक्टेयर से अधिक जमीन पर केवल सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इस खेती के दम पर उन्हें एक सीजन में 4 से 5 लाख रुपए का मुनाफा होता है। इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि अजय सिंह ने अब तक किसी भी सरकारी अनुदान या सब्सिडी की मदद नहीं ली है। उन्होंने स्वयं के संसाधनों और अपनी सूझबूझ से खेती को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनके खेतों में साल भर हर मौसम की ताजी सब्जियां उपलब्ध रहती हैं।
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