धोखाधड़ी मामले में देवरिया जेल में बदं पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की शनिवार को पेशी हुई। सीजेएम कोर्ट में उनकी जमानत पर करीब 30 मिनट तक बहस हुई। इस दौरान लखनऊ से आए जांच अधिकारी (IO) कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। इस पर जज ने जांच अधिकारी को फटकार लगाई। कहा- अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी आवश्यक थी। उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया मजबूत हैं। इसलिए कोर्ट मामले की जांच की मॉनिटरिंग करेगा। जज ने जांच अधिकारी से गिरफ्तारी के आधार, साक्ष्यों की उपलब्धता और जांच की दिशा से जुड़े कई सवाल पूछे। जांच अफसर किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर जज ने जांच अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। अमिताभ बोले- चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की गई
जेल में भूख हड़ताल के बीच पेशी पर लाए गए अमिताभ ठाकुर ने कहा- चुनिंदा कार्रवाई करते हुए सिर्फ मुझे निशाना बनाया गया है, जबकि वास्तविक और प्रभावशाली आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे ही मैंने पूर्व सांसद धनंजय सिंह से जुड़े तथ्यों और आरोपों को सार्वजनिक किया। इसके बाद से ही साजिश रची जाने लगी। मैंने वाराणसी के कुछ बड़े भाजपा नेताओं के नाम भी सामने रखे थे, जिसके तुरंत बाद वाराणसी में मेरे ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। फिलहाल मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। पूर्व IPS बोले- मुझे लगा मेरा एनकाउंटर कर देंगे
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन मुझे रात करीब 2 बजे अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। रात के सन्नाटे में जिस तरह से मुझे उठाया गया, उससे मुझे लगा कि कहीं मेरा एनकाउंटर न कर दिया जाए। उस रात मैं वास्तव में काफी घबरा गया था। केवल कोडीन कफ सिरप मामले में मुझे फंसाया गया है, जबकि इस पूरे प्रकरण में आज भी मेरे पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहा था, लेकिन रास्ते में मेरे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेज छीन लिए गए, ताकि याचिका दाखिल न कर सकूं। कोडीन मामले में शिवम जायसवाल प्यादा
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा- इस मामले में शिवम जायसवाल केवल एक “प्यादा” है, जबकि इसके पीछे कहीं ज्यादा गहरी साजिश और बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे नेटवर्क की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें दो-तीन बड़े नाम ऐसे हैं, जिनका उन्होंने पहले ही खुलासा किया है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर कोई एक्शन क्यों नहीं?
अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अब तक न तो उनसे पूछताछ की गई और न ही जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है। पूर्वांचल के कुछ बड़े माफियाओं के नाम भी इस प्रकरण में सामने आ रहे हैं, लेकिन उन पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। कोर्ट की पहल पर मैंने अपना आमरण अनशन 15 तारीख तक स्थगित कर दिया है। इस दौरान मुझे देवरिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज भी प्राप्त हुए हैं, जो अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं। कोर्ट से मुझे अन्य सबूत उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य संबंधी सहायता देने का आश्वासन मिला है। वकील बोले- 25 साल पुराने मामले में अचानक गिरफ्तारी क्यों?
सुनवाई के दौरान अमिताभ के वकील अभिषेक शर्मा ने कहा- जिस मामले में उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया है, वह करीब 25 वर्ष पुराना है। इतने लंबे समय में भी जांच एजेंसियां कोई ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में असफल रहीं। मामले को जानबूझकर लंबित रखा गया और अब अचानक गिरफ्तारी कर दी गई, जो न्यायसंगत नहीं है। जेल में हो रही नियमित जांच
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर देवरिया में दर्ज धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला वर्ष 1999 से जुड़ा है। शुक्रवार से उन्होंने जिला कारागार में आमरण अनशन शुरू किया था, जो शनिवार को भी जारी रहा। अनशन की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन ने मेडिकल टीम को अलर्ट कर दिया है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। अजय राय बोले- गिरफ्तारी के समय की CCTV सामने लानी चाहिए
इधर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अमिताभ ठाकुर को लेकर कहा- उनकी गिरफ्तारी के समय की CCTV फुटेज और CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) उपलब्ध कराई जाए, ताकि कथित पुलिसिया उत्पीड़न का सच सामने आ सके। लेकिन पुलिस इन सबूतों को देने से इनकार कर रही है। अजय राय ने कहा- एक ईमानदार पूर्व आईपीएस अधिकारी को 1999 के 25-26 साल पुराने प्लॉट आवंटन मामले में FIR दर्ज कर जेल में ठूंस दिया गया। वहीं, बाहुबली, कोडीन माफिया, अवैध खनन करने वाले और खुलेआम धमकियां देने वाले आजाद घूम रहे हैं। जेल में भी अमिताभ ठाकुर के साथ बदसलूकी और उत्पीड़न जारी है। उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई है, जान पर खतरा बन आया है, लेकिन सत्ता और सिस्टम खामोश है। अब वो मामला जानिए, जिसमें अरेस्ट हुए पूर्व IPS
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विराम खंड निवासी अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने साल 1999 में देवरिया में एसपी रहते हुए अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम औद्योगिक क्षेत्र में एक प्लाट खरीदा था। प्लाट आवंटन के दौरान पत्नी नूतन ठाकुर का नाम ‘नूतन देवी’ और पति का नाम ‘अभिजात’ अंकित कराया गया था, जबकि उनका वास्तविक नाम अमिताभ ठाकुर है। इस प्लाट का एलाटमेंट नूतन इंडस्ट्रीज के नाम पर हुआ था। लेकिन, 3 साल तक एक ईंट नहीं रखी गई। सितंबर, 2002 में नूतन ठाकुर ने इस जमीन की लीज डीड शराब और कंस्ट्रक्शन कारोबारी संजय प्रताप सिंह को ट्रांसफर कर दी। 6 हजार स्क्वायर फीट का यह प्लॉट देवरिया शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र में है। यह B-2 श्रेणी का है। यहां कोई उद्योग नहीं लगा है। अभी यहां पर श्रीनेत शांडिल्य कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस है। यह संजय प्रताप सिंह का है। संजय देवरिया के शराब और कंस्ट्रक्शन के बड़े कारोबारियों में शामिल हैं। देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था। सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच के दौरान देवरिया सदर कोतवाली में भी इस मामले में एक और केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने 10 दिसंबर को शाहजहांपुर में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में पेश किया था। यहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। ———— ये खबर भी पढ़ें गैंगरेप कर बच्ची की हत्या, लाश तीसरी मंजिल से फेंकी, बुलंदशहर में आरोपियों का एनकाउंटर यूपी के बुलंदशहर में 6 साल की बच्ची के साथ दो युवकों ने गैंगरेप किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बच्ची शुक्रवार शाम अपने घर के बाहर अकेले खेल रही थी, तभी आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ में ले गए। बारी-बारी से रेप किया। पूरी खबर पढ़ें
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