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अब प्लाट में भरा पानी नहीं बनेगा मौत की वजह:नोएडा सेक्टर-150 के पास सिचाईं विभाग बनाएगा हेड रेगुलेटर, 23 करोड़ रुपए होंगे खर्च

युवराज की कार जिस बेसमेंट में डूबी वो 70 फीट गहरा था। 2022 से यहां पानी भरना शुरू हुआ। 2023 में हिंडन और यमुना में बाढ़ के बाद ये तालाब में तब्दील हो गया। पानी पुश्ते से टकराया लेकिन नदी में वापस नहीं गया। सेक्टर-150 और इससे जुड़े अन्य सेक्टर में जलभराव न हो इसके लिए अब स्थायी हल निकाल लिया गया है। 2023 से कागजों में बंद हेड रेगुलेटर की फाइल को दोबारा से ओपन कर उसे अप्रूवल दे दिया गया है। सिचाईं विभाग यहां हेड रगुलेटर बनाएगा। जिस पर करीब 23 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ये पैसा प्राधिकरण सिचाईं विभाग को देगा। दरअसल ये हेड रेगुलेटर पहले बन जाता तो खाली प्लाटों में पानी भरने की समस्या न होती। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने साल 2015 में ही सेक्टर-150 से बारिश के पानी को हिंडन नदी में मोड़ने के लिए एक हेड रेगुलेटर के निर्माण का प्रस्ताव रखा था। 9 अक्टूबर 2023 को सिंचाई निर्माण खंड, गाजियाबाद के कार्यकारी अभियंता द्वारा नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक को भेजे गए पत्र में इस परियोजना के लंबे समय से लंबित रहने का पूरा ब्यौरा दिया गया है। ज्वाइंट टीम का किया गया निरीक्षण
पत्र में 2015 से 2023 के बीच हुए कई पत्राचार का ज़िक्र है, जिनमें विकसित हो रहे सेक्टरों के बारिश के पानी को हिंडन नदी तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई थी। पत्र के अनुसार, 4 अक्टूबर 2023 को सेक्टर-150 में प्रस्तावित रेगुलेटर स्थल पर संयुक्त निरीक्षण किया गया था। इसमें नोएडा प्राधिकरण के डिप्टी जनरल मैनेजर (सिविल व जल), वरिष्ठ व सहायक प्रबंधक तथा सिंचाई विभाग के इंजीनियर शामिल थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि फरवरी 2016 में नोएडा प्राधिकरण ने सर्वे, डिज़ाइन और ड्रॉइंग के लिए सिंचाई विभाग को 13.5 लाख जारी किए थे। प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर एक कंसल्टेंट के माध्यम से डिज़ाइन तैयार कराए गए, जिन्हें IIT दिल्ली से अनुमोदन भी मिला। पहले मैकेनिकल बाद में स्मार्ट वॉटर योजना
प्रारंभिक योजना में मैकेनिकल गेट वाला रेगुलेटर प्रस्तावित था। हालांकि अक्टूबर 2023 के निरीक्षण के दौरान नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अन्य सेक्टरों का स्टॉर्मवॉटर भी इसी नाले से जुड़ चुका है, जिससे डिस्चार्ज बढ़ सकता है। इसके चलते मैकेनिकल गेट की जगह हाइड्रोलिक या न्यूमैटिक गेट लगाने का सुझाव दिया गया। संसोधित डिजाइन 30 लाख में तैयार किया गया। जल्द शुरू होगा काम
प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि हेड रेगुलेटर बनाने का काम सिचाईं विभाग करेगा। इसके लिए अनुबंध के अनुसार अप्रूवल दिया गया है। जल्द ही यहां काम शुरू करा दिया जाएगा।


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