म्योरपुर थाना क्षेत्र में एक अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ धोखाधड़ी कर उसकी जमीन हड़पने और विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने का मामला सामने आया है। न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने क्षेत्र में तैनात लेखपाल राघवेंद्र और उसके कथित सहयोगी लालमोहर शाह के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पतेरी गांव निवासी पीड़िता यशोदा देवी ने पुलिस को बताया कि वह अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं और म्योरपुर गांव में उनके नाम कृषि भूमि दर्ज है। उन्होंने खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंक से ऋण लिया था। इस ऋण की अदायगी के लिए वह अपनी जमीन का एक छोटा हिस्सा बेचने की योजना बना रही थीं। इसी दौरान सुपाचूआ हल्के में तैनात लेखपाल राघवेंद्र ने उनसे संपर्क किया और जमीन बिक्री तथा ऋण भुगतान में मदद का भरोसा दिलाया। पीड़िता के अनुसार, लेखपाल के झांसे में आकर उन्होंने अपनी जमीन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उसे सौंप दिए। यह तय हुआ था कि केवल पांच बिस्वा भूमि बेची जाएगी। आरोप है कि लेखपाल ने धोखाधड़ी करते हुए पांच बिस्वा से कहीं अधिक, लगभग एक बीघा जमीन का बैनामा करा दिया। यह बैनामा अपने कथित करीबी और फाटपखना गांव निवासी लालमोहर शाह के नाम 4 दिसंबर 2024 को कराया गया। यशोदा देवी को इस पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब कुछ समय बाद आरोपी लेखपाल उस जमीन पर निर्माण के इरादे से ईंट गिरवाने पहुंचा। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया और बैनामे को लेकर सवाल उठाए, तो आरोप है कि लेखपाल ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और उन्हें धमकाने का प्रयास किया। यशोदा देवी ने बताया कि उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया, जिसके बाद लेखपाल राघवेंद्र और लालमोहर शाह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
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