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अनुदेशक शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज:पांच महीने से ऑर्डर रिज़र्व; 25 हजार अनुदेशकों के लिए 17 हजार रुपये मानदेय का मामला

उत्तर प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों के लिए 17 हजार रुपये मानदेय का मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने इस बहुप्रतीक्षित मामले में 16 सितंबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था और अब करीब पांच महीने बाद बुधवार को आदेश जारी किए जाने की संभावना है। अनुदेशकों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित
अनुदेशकों के मानदेय से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब तीन घंटे तक विस्तृत सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट की टिप्पणियों से अनुदेशकों के पक्ष में माहौल बनता नजर आया।
“जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया” : सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने कहा, “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। आपको मानदेय देने में क्या दिक्कत है?” कोर्ट की इस टिप्पणी पर राज्य सरकार के वकील ने भी सहमति जताई, जिससे अनुदेशकों की उम्मीदें और मजबूत हो गईं।
2017 में दोगुना हुआ था मानदेय, नहीं हुआ लागू
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में 8,470 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया था। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची
लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपये मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केवल एक वर्ष के लिए 17,000 रुपये मानदेय भुगतान का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
दो साल बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई बहस
करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता सखाराम यादव, पी.एस. पटवालिया और दुर्गा तिवारी ने अनुदेशकों की ओर से मजबूत पक्ष रखा। मुख्य याचिकाकर्ता आशुतोष शुक्ला, राकेश पटेल सहित अन्य याची भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। अनुदेशकों के विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का रुख अनुदेशकों के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
बुधवार को आ सकता है फैसला, 25 हजार अनुदेशकों की निगाहें टिकीं
16 सितंबर 2025 को आदेश सुरक्षित होने के करीब पांच महीने बाद अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है। प्रदेश के 25 हजार से अधिक अनुदेशकों की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए 17,000 रुपये मानदेय का पूरा लाभ दिलाएगा।


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