आगरा के सूरसदन ऑडिटोरियम में शनिवार की शाम उस समय खास बन गई, जब रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान की ओर से रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा ‘चांदनी रातें’ का मंचन किया गया। मंच से जैसे ही संवाद गूंजा— “ये प्यार… प्यार क्या है?” पूरा सभागार भावनाओं में डूब गया।
यह नाटक विश्वप्रसिद्ध लेखक फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की कहानी “व्हाइट नाइट्स” पर आधारित है। कहानी एक युवती के भावनात्मक द्वंद्व को दर्शाती है, जो दो प्रेम कहानियों के बीच उलझी हुई है। एक ओर वर्षों से इंतजार करता उम्र में बड़ा प्रेमी है, तो दूसरी ओर एक रात में जन्मा मासूम और संवेदनशील रिश्ता। उसका चुनाव ही नाटक की आत्मा बन जाता है।
संवेदनशील लेखक की भूमिका में मंत्र मुग्ध ने अकेलेपन और प्रेम को सशक्त अभिनय से प्रस्तुत किया। नास्तेनका के किरदार में गिरिजा ओक गोडबोले ने अपने भावपूर्ण संवाद, नृत्यात्मक अभिव्यक्ति और आँखों की भाषा से दर्शकों को गहराई से जोड़ा। राजीव कुमार और अनामिका तिवारी ने भी अपने किरदारों को मजबूती दी।
सहयोगी कलाकार कौस्तव सिन्हा, शिमली बसु, सुभश्री साहू, तृप्ति खामकर, गिरिश शर्मा, राज शेखर, पियूष कुमार, प्रेरणा और आशीष मिश्रा ने हास्य और भावनात्मक दृश्यों का संतुलन बनाए रखा।
नाटक का निर्देशन देश की जानी-मानी रंगकर्मी पूर्वा नरेश ने किया। उन्होंने रूसी परिवेश को भारतीय भावनाओं के साथ खूबसूरती से जोड़ा। मंच सज्जा सेंट पीटर्सबर्ग के नेवा नदी किनारे का अहसास कराती है।
क्रिएटिव प्रोड्यूसर अस्मित पाठारे, प्रोडक्शन डिज़ाइनर कुशल महंत, लाइट डिज़ाइनर संकेत पारखे, साउंड डिज़ाइनर वरुण गुप्ता व निखिल वर्गिस और कोरियोग्राफर अंजलि पोलाइट के काम ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक समाजसेवी विजय कुमार बंसल मौजूद रहे। वरिष्ठ पत्रकार व संस्कृति कर्मी गिरजा शंकर शर्मा, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. मुकेश जैन, शबद मिश्र सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।
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