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सुल्तानपुर में डॉक्टर पति समेत 5 पर FIR:दहेज में 10 लाख और गाड़ी मांगने का आरोप, घर से निकाला

सुल्तानपुर में दहेज उत्पीड़न का एक मामला सामने आया है। सिविल जज के आदेश पर एक डॉक्टर पति सहित पांच ससुराल वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता ने पति और ससुराल वालों पर 10 लाख रुपये नकद और चार पहिया वाहन की मांग करने का आरोप लगाया है। कुड़वार थाना क्षेत्र के पूरे देवी दीन तिवारी का पुरवा, राजापुर निवासी सुनीता देवी की शादी 25 अप्रैल 2024 को लंभुआ थाना क्षेत्र के चौकिया गांव निवासी नागेंद्र कुमार मिश्रा से हुई थी। शादी से पूर्व नागेंद्र के परिवार ने बताया था कि वह नेत्र चिकित्सक है और फैजाबाद बाईपास पर नयना आई हॉस्पिटल का संचालन करता है। सुनीता के भाई रमेश ने गोदभराई में 2 लाख रुपये, बरीक्षा में 1 लाख 51 हजार रुपये, तिलक में 5 लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल सहित अन्य सामान दिए थे। इसके बावजूद, नागेंद्र कुमार मिश्रा और उनके परिवार वाले इस दहेज से संतुष्ट नहीं थे। शादी के एक सप्ताह बाद ही पति नागेंद्र कुमार मिश्रा, सास जय देवी, ससुर रामजीत, चचिया ससुर रामपाल व राजपाल और देवर विकास ने सुनीता को कम दहेज के लिए ताना मारना शुरू कर दिया। आरोप है कि वे उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। ससुराल वालों ने सुनीता से कहा कि लड़का डॉक्टर है और यदि उसकी शादी किसी अच्छी जगह हुई होती तो उन्हें चार पहिया गाड़ी और लगभग 50 लाख रुपये मिलते। उन्होंने सुनीता से 10 लाख रुपये नकद और एक चार पहिया गाड़ी लाने की मांग की। सुनीता को बाद में पता चला कि उसके पति का संबंध कोमल नाम की एक लड़की से है, जिससे वह रात में घंटों बात करता था। जब सुनीता ने इस बारे में पूछा, तो पति उसे गाली-गलौज करता और मारपीट करता था। 29 मई 2024 को सुनीता ससुराल से अपने मायके चली गई। ससुराल वालों ने कथित तौर पर उससे कहा कि यदि वह 10 लाख रुपये और चार पहिया गाड़ी के बिना वापस आई तो उसे जिंदा जला देंगे। इस दौरान सुनीता गर्भवती हो गई, लेकिन ससुराल वाले उसे लेने नहीं आए। 8 जुलाई 2024 को वह खुद ससुराल वापस गई। उसके भाई रमेश ने पति को दूसरी जगह डिस्पेंसरी खोलने के लिए 50,000 रुपये की व्यवस्था करके दिए, लेकिन ससुराल वाले इससे भी संतुष्ट नहीं हुए। 27 जुलाई 2024 को ससुराल वालों ने सुनीता को मारपीट कर घर से निकाल दिया। 9 फरवरी 2025 को उसने एक लड़के को जन्म दिया। बच्चे के दवा-इलाज में काफी पैसा खर्च हुआ, जिसमें पति और ससुराल वालों ने कोई आर्थिक मदद नहीं की। पीड़िता ने पहले पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां सिविल जज के आदेश पर मामला दर्ज किया गया।


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