चित्रकूट मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम स्कीम’ पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी की अध्यक्षता में हुआ। इसमें आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी डॉ. एन.के. जतारिया, चिकित्सा अधीक्षक, ई-डार मैनेजर, डीआईयू सदस्य, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, निजी चिकित्सालयों के डॉक्टर और आरोग्य मित्र शामिल हुए। सीएमओ डॉ. द्विवेदी ने बताया कि यह योजना भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 5 मई 2025 से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल हुए व्यक्तियों को तत्काल और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। 3 तस्वीरें देखिए… योजना के तहत, दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति, चाहे वह भारतीय नागरिक हो या विदेशी, को दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना अनिवार्य है। 24 घंटे के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीज इस योजना के पात्र नहीं होंगे। घायल मरीज को पुलिस, राहगीर, परिजन या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जाएगा। पुलिस विभाग द्वारा प्रस्तुत ई-डार आईडी के माध्यम से मरीज को अधिकतम 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखकर 1.50 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार दिया जाएगा। यह प्रावधान प्रति व्यक्ति, प्रति दुर्घटना के लिए है। यदि ई-डार आईडी रद्द हो जाती है या दुर्घटना प्रमाणित नहीं होती है, तो मरीज तीन दिन के भीतर स्वतः ही पोर्टल से डिस्चार्ज हो जाएगा।
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